उत्तराखंड में कार्यरत भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए अच्छी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार इन तीनों वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी की दिशा में गंभीरता से कदम उठा रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय पर सरकार मंथन में
प्रदेश में 40 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं सेवाएं दे रही हैं, जो लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रही हैं। वर्तमान में इन्हें केंद्र सरकार की ओर से ₹4500 और राज्य सरकार की ओर से ₹4800 प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। अब राज्य सरकार द्वारा इसमें और बढ़ोतरी किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
मानदेय वृद्धि के लिए प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक बंशीलाल राणा के अनुसार, विभाग अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुका है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे मानदेय के साथ-साथ अन्य राज्यों में मिलने वाले मानदेय का भी तुलनात्मक विवरण शामिल है।
24 हजार भोजन माताओं के मानदेय में भी हो सकता है इजाफा
प्रदेश में पीएम पोषण योजना के अंतर्गत करीब 24 हजार भोजन माताएं कार्यरत हैं। वर्तमान में उन्हें ₹3000 मानदेय मिलता है, जिसमें ₹900 केंद्र सरकार और ₹100 राज्यांश के रूप में शामिल है, जबकि राज्य सरकार अलग से ₹2000 अतिरिक्त देती है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक भोजन माताओं के मानदेय बढ़ाने को लेकर भी प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
आशा कार्यकर्ताओं को भी मिलेगा लाभ
सरकार की योजना केवल भोजन माताओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है। राज्य में कार्यरत लगभग 12 हजार आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में भी बढ़ोतरी किए जाने की तैयारी है। अधिकारियों का कहना है कि तीनों वर्गों के मानदेय पर एक साथ निर्णय लेने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।
जल्द हो सकता है बड़ा फैसला
सरकारी स्तर पर चल रही कवायद को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर कोई ठोस फैसला लिया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह हजारों महिला कर्मियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।













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