देहरादून। जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर शासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए ऋषिकेश के उप निबंधक को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में सब रजिस्ट्रार कार्यालय, ऋषिकेश में गंभीर अनियमितताएं उजागर होने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
डीएम के औचक निरीक्षण में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
आमजन की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर डीएम ने उप जिलाधिकारी, ऋषिकेश एवं जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व), देहरादून की उपस्थिति में कार्यालय का निरीक्षण किया। संयुक्त जांच आख्या में पाया गया कि—
- उप निबंधक बिना सूचना के अनुपस्थित थे।
- उनकी अनुपस्थिति में निबंधक लिपिक द्वारा अवैधानिक रूप से विलेखों का पंजीकरण किया जा रहा था।
- एक कथित “घोस्ट कार्मिक” बिना नियुक्ति पत्र एवं बिना उपस्थिति पंजिका में नाम दर्ज किए कार्यरत मिला।
- पंजीकृत दस्तावेज महीनों/वर्षों तक कार्यालय में लंबित रखे गए।
- अर्जेंट रजिस्ट्री नकल, जो 24 घंटे में दी जानी चाहिए, वह भी महीनों तक लंबित पाई गई।
करोड़ों की स्टाम्प चोरी और भूमि उपयोग में गड़बड़ी
जांच में औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि को आवासीय दरों पर छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर रजिस्ट्री किए जाने का मामला सामने आया। विशेष रूप से ग्राम माजरी ग्रांट, तहसील डोईवाला में दून घाटी विशेष महायोजना 2031 के अंतर्गत आरक्षित औद्योगिक भूमि का आवासीय दरों पर पंजीकरण किए जाने की प्रक्रिया पाई गई।
इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है।
नियमों की अनदेखी, राजस्व को भारी क्षति
निरीक्षण में पाया गया कि उप निबंधक द्वारा—
- भारतीय स्टाम्प (उत्तराखण्ड संशोधन) अधिनियम 2015 की धारा 47(क)
- भारतीय रजिस्ट्रेशन मैनुअल के नियम 325, 195 एवं 196
- उत्तराखंड शासन की अधिसूचना संख्या 368/28.04.2016
का पालन नहीं किया गया।
सम्पत्ति मूल्यांकन संबंधी ज्ञान के अभाव और नियमों की अनदेखी के कारण स्टाम्प अपवंचना के मामले सामने आए, जिससे शासन को गंभीर राजस्व क्षति हुई।
आमजन को महीनों तक परेशान किया गया
निरीक्षण के दौरान उपस्थित फरियादियों ने बताया कि—
- मूल अभिलेख तीन दिन की निर्धारित समय-सीमा के बावजूद महीनों तक वापस नहीं किए गए।
- रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रतियां देने में अनावश्यक देरी की गई।
- सैकड़ों मूल विलेख अलमारियों में धूल खाते मिले।
शासन ने लिया सख्त एक्शन
जिला प्रशासन की संस्तुति पर शासन ने उप निबंधक को निलंबित करते हुए मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है तथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राजस्व हितों से खिलवाड़, भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आगे भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।













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