नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पांच परिवारों के सपने हमेशा के लिए छीन लिए। अचानक भरभराकर गिरी इमारत के मलबे में दबकर दिल्ली यूनिवर्सिटी के पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हो गई। करीब 27 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मलबे से सभी लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं, जिनमें तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।
एम्स में पोस्टमार्टम के बाद मृतकों की पहचान की गई। मृतकों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रहने वाले पांच छात्र शामिल हैं। हादसे के बाद पुलिस ने बिल्डिंग मालिक परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है।
एम्स में पोस्टमार्टम के बाद सात मृतकों की हुई पहचान
एम्स दिल्ली की ओर से सात मृतकों के पोस्टमार्टम की जानकारी दी गई। मृतकों में दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ने वाले पांच छात्र शामिल हैं। इनकी उम्र महज 16 से 20 साल के बीच बताई गई है।
मृतकों की पहचान मध्य प्रदेश के अर्पित राज और अक्षत सिंह, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के युवराज सोनी, उत्तर प्रदेश के अभिषेक कुमार और औरैया निवासी पवन कुमार के रूप में हुई है।
इनके अलावा दो मजदूरों परम लाल कोरी और सुरेंद्र सिंह की भी हादसे में मौत हुई है। एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
रक्षाबंधन मनाकर लौटा था अर्पित, कुछ घंटों बाद चली गई जान
मध्य प्रदेश के देवास जिले का रहने वाला अर्पित राज रक्षाबंधन की छुट्टियां मनाकर हाल ही में दिल्ली लौटा था। परिवार को क्या पता था कि घर से लौटने के कुछ ही घंटों बाद एक दर्दनाक हादसा उनके बेटे को हमेशा के लिए उनसे दूर कर देगा।
अर्पित दिल्ली में पढ़ाई कर रहा था और अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देख रहा था। हादसे की खबर के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पिता की दवा दुकान का इकलौता सहारा था युवराज
छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर के रहने वाले युवराज सोनी अपने पिता की दवा दुकान के इकलौते बेटे थे। परिवार को उनसे भविष्य की बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन सत्य निकेतन का हादसा पूरे परिवार की खुशियां छीन ले गया।
युवराज के जाने से परिवार ने न सिर्फ अपना बेटा खोया, बल्कि वह सहारा भी खो दिया जिस पर भविष्य की कई उम्मीदें टिकी थीं।
होनहार छात्र था अक्षत, IPS बनने का था सपना
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के रहने वाले अक्षत यादव भी हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों में शामिल थे। उनके पार्थिव शरीर को पैतृक घर लाया गया।
अक्षत की शिक्षिका सीमा यादव ने उन्हें याद करते हुए बताया कि वह पढ़ाई में बेहद होनहार थे। वह अच्छे फुटबॉलर और प्रभावी वक्ता भी थे। अक्षत का सपना आगे चलकर IPS अधिकारी बनने का था।
परिवार और शिक्षकों को हादसे की जानकारी मिलने के बाद लंबे समय तक उनके सुरक्षित होने की उम्मीद बनी रही, लेकिन अगले दिन उनके निधन की पुष्टि हो गई।
पवन, अभिषेक और दूसरे छात्रों के परिवारों पर भी टूटा दुखों का पहाड़
औरैया के रहने वाले पवन कुमार मोतीलाल नेहरू कॉलेज में BSc के छात्र थे। वहीं उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के रेणुकूट इलाके के रहने वाले अभिषेक कुमार भी हादसे में अपनी जान गंवा बैठे।
इन छात्रों के परिवारों ने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के सपनों के साथ दिल्ली भेजा था, लेकिन एक पल में सब कुछ खत्म हो गया।
27 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
बिल्डिंग गिरने की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए करीब 27 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
मलबे से निकाले गए घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के बाद कुल 12 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें सात की मौत हो गई और पांच का इलाज जारी है।
घायलों में असगर अली, नीरज बावा, आदित्य कुमार, नितीश चिब और मोहम्मद अयान शामिल हैं। इनमें तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।
बिल्डिंग मालिक परिवार गिरफ्तार, दो को न्यायिक और एक को पुलिस हिरासत
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने बिल्डिंग मालिक परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों में हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और उनका बेटा महेश शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने हरिराम और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, जबकि महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।
हादसे के बाद PG छोड़ने को मजबूर हुए छात्र
सत्य निकेतन हादसे के बाद इलाके में रहने वाले छात्रों में भी डर का माहौल है। कई छात्र अपने PG छोड़कर सुरक्षित जगहों की तलाश में निकल गए।
बताया गया कि बड़ी संख्या में छात्र श्री वेंकटेश्वर कॉलेज पहुंचे, जहां कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल उनके रहने और खाने की व्यवस्था की है।
हालांकि छात्रों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे आगे कहां और कितने सुरक्षित माहौल में रहेंगे।
PG और किराए की बिल्डिंगों की सुरक्षा पर उठे सवाल
सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराए की बिल्डिंगों में रहते हैं। ऐसे में इस हादसे ने दिल्ली में PG और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रों का कहना है कि उन्हें यह पता ही नहीं होता कि जिस बिल्डिंग में वे रह रहे हैं, वह संरचनात्मक रूप से सुरक्षित है या नहीं। ऐसे में प्रशासन की ओर से नियमित Building Safety Inspection और जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच की मांग तेज हो गई है।
क्या सिर्फ बिल्डिंग मालिक की गिरफ्तारी से खत्म होगी जिम्मेदारी?
हादसे के बाद बिल्डिंग मालिक परिवार की गिरफ्तारी तो हो गई, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल मालिकों की जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त है?
यह भी जांच का विषय है कि संबंधित विभागों ने बिल्डिंग की स्थिति की समय-समय पर जांच क्यों नहीं की। अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो वह इतने समय तक प्रशासन की नजरों से कैसे बची रही?
छात्रों और स्थानीय लोगों की मांग है कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो और अगर किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय की जाए।
छात्रों की मांग- सभी PG बिल्डिंगों की हो तत्काल जांच
हादसे के बाद छात्रों ने प्रशासन से सत्य निकेतन समेत दिल्ली के उन सभी इलाकों में PG और किराए की इमारतों की सुरक्षा जांच कराने की मांग की है, जहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं।
छात्रों की मांग है कि असुरक्षित घोषित होने वाली इमारतों से छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए और PG संचालकों के जरूरी सुरक्षा दस्तावेजों की जांच की जाए।
सत्य निकेतन का यह हादसा सिर्फ सात जिंदगियों के खत्म होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी छोड़ गया है कि शहरों में छात्रों और किरायेदारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? पांच युवा सपने अब हमेशा के लिए खामोश हो चुके हैं, लेकिन उनकी मौत से उठे सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है।














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