पहाड़ों में मुख्य समस्या बनते जा रहे जंगली सुअर, फसलें कर रहे बर्बाद।

बागेश्वर : देवभूमि उत्तराखंड में बागेश्वर तहसील क्षेत्र के बहुली गांव में जंगली सुअरों का आतंक छाया हुआ है। वैसे गोमती घाटी के अधिकतर गांवों में इन दिनों जंगली जानवरों का आतंक बना हुआ है। जंगली सुअरों के झुंड खेतों में घुसकर काश्तकारों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं और लोगों पर भी हमले का डर बना हुआ है। किसान अपनी फसल की सुरक्षा करने को रात में भी खेतों पर ही रहने को मजबूर है।

पहाड़ों में अधिकतर लोग खेती करते हैं। जिससे उनके व उनके परिवार की आजीविका चलती है। लेकिन जंगली सुअरों के आतंक के चलते गांव के किसानों को खेती में भारी नुक़सान हो रहा है। शनिवार की रात दस बजे जब सुआरों का एक झुण्ड गाँव में पहुंचा तो महिलाओं व बच्चों ने मोर्चा सम्भाला। उन्होंने लाठी, डंडों व कंटर बजाकर उन्हें गाँव से बाहर खदेड़ कर ही दम लिया। पर इससे समस्या कहीं खत्म होती नजर नही आयी बल्कि हमले का खतरा बड़ गया। महिलाओं के इस जज़्बे को हर कोई सलाम कर रहा है।

 

बहुली के ग्राम प्रधान सोनी परिहार, आनंदी परिहार, सरसवती परिहार, गोविन्दी देवी, क़मला परिहार, भगवती रौतेला, विमला नेगी, हर्षिता परिहार, वर्षा नेगी, कंचन सिंह, डूंगर सिंह, माधो सिंह, राहुल सिंह, खीम सिंह, दीपक परिहार आदि ग्रामीणों ने बताया कि आलू व गेहूं की फसल को इन जंगली सूअरों ने काफी नुकसान पहुंचाया है। जिसके चलते लोगों की आर्थिक हालत भी कमजोर हो रहे हैं।  ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि जंगली सुअरों को रोकने के प्रबंध किए जाएं। साथ ही फसलों की सुरक्षा के लिए इन जंगली सूअरों की धर पकड़ करा कर कहीं दूर छोड़े जाने की मांग की है।

 

ग्रामीण दीपक परिहार का कहना है कि आज एक तरफ जब हमारी सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही हैं, उस समय में यदि किसान जंगली जानवरों से अपनी फसलें ही नहीं बचा पाएंगे तो आय का प्रश्न तो बहुत पीछे चला जाता है। सबसे पहले तो बात उस प्रबन्धन की होनी चाहिए, जिससे जो भी, जैसी भी फसल हो वो कटाई होने तक बची तो रहे। जब लागत निकलेगी तब तो हम आय के बारे में सोच पाएंगे। इस लिहाज से सबसे पहले जंगली सुअरों से खेतों को बचाने के उपायों पर विचार कर कोई ठोस कदम उठाए जायें।

ग्राम प्रधान सोनी परिहार ने बताया कि कई बार वन विभाग को सूचना देने के बाद भी न तो इनके आतंक से निजात दिलाई जा रही है और न ही किसानों को कोई मुआवजा दिया जा रहा है। परेशान किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वन विभाग जंगली सुअरों की समस्या से निजात नहीं दिलाता है, तो उन्हें आंदोलन छेड़ने को बाध्य होना पड़ेगा।

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