उत्तराखंड में नकली NCERT किताबों का बड़ा खेल! रुद्रपुर में एक लाख से ज्यादा किताबें बरामद

रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर): उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में नकली NCERT किताबों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। देर रात पुलिस कार्रवाई में एक ट्रक और गोदाम से एक लाख से अधिक संदिग्ध किताबें बरामद की गई हैं। प्राथमिक जांच में इन किताबों के फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं।

देर रात ट्रक रोककर हुआ खुलासा

पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम कीरतपुर स्थित एक गोदाम में NCERT की किताबों से भरा ट्रक पहुंचने वाला है। सूचना के आधार पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी।
रात करीब एक बजे आनंद बैंक्वेट हॉल के पास पुलिस ने ट्रक को रोककर जांच की। तलाशी के दौरान ट्रक में कक्षा 1 से 12 तक की विभिन्न विषयों की बड़ी संख्या में किताबें मिलीं। इसके बाद पुलिस ने संबंधित गोदाम में भी छापेमारी की, जहां से भारी मात्रा में किताबें बरामद हुईं।

शिक्षा विभाग को बुलाकर शुरू की गई जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया। अधिकारियों ने किताबों के नमूने लेकर जांच शुरू कर दी है और पूरे मामले की रिपोर्ट NCERT को भी भेज दी गई है।

कई शहरों से जुड़ी बिलिंग के दस्तावेज मिले

छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों में कानपुर, सुल्तानपुर और हैदराबाद से जुड़ी बिलिंग के संकेत मिले हैं। इसके अलावा जांच में गौलापार (हल्द्वानी) स्थित राजीव बुक डिपो और रामपुर का नाम भी सामने आया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किताबें कहां छापी गईं और इन्हें किन बाजारों में सप्लाई किया जाना था।

प्रारंभिक जांच में कई तकनीकी गड़बड़ियां

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने किताबों का निरीक्षण करने के बाद बताया कि शुरुआती जांच में कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं।
प्रभारी मुख्य शिक्षाधिकारी हरेंद्र मिश्रा के अनुसार किताबों में कई तरह की अनियमितताएं दिखाई दी हैं। पूरी रिपोर्ट NCERT को भेजी गई है और अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

केवल तीन फर्मों को है छपाई की अनुमति

शिक्षा विभाग के अनुसार उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों के लिए NCERT की किताबों की छपाई केवल तीन अधिकृत प्रिंटिंग फर्मों को दी गई है। इनमें

  • राज एंटरप्राइजेज (हल्द्वानी)
  • दीपक प्रिंटर्स
  • आस्टर प्रिंटर्स (मथुरा)

शामिल हैं। इन कंपनियों के अलावा किसी अन्य संस्था को NCERT की किताबें छापने की अनुमति नहीं है, जिससे बरामद किताबों को लेकर संदेह और गहरा गया है।

मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में खुलवाया गया गोदाम

रुद्रपुर कोतवाली प्रभारी मनोज रतूड़ी ने बताया कि सूचना मिलने के बाद ट्रक को कब्जे में लिया गया और प्रशासन को जानकारी दी गई। इसके बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में गोदाम का ताला खुलवाकर तलाशी ली गई। बरामद किताबों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी कार्रवाई के दौरान करीब 265 कुंतल नकली किताबों के कवर बरामद किए गए थे। इसके बाद से ही आशंका जताई जा रही थी कि इलाके में लंबे समय से नकली किताबों का संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

ऐसे पहचानें असली और नकली NCERT किताब

विशेषज्ञों के अनुसार असली और नकली NCERT किताबों में कुछ स्पष्ट अंतर होते हैं।

  • असली किताबों के पन्नों पर हल्का वाटरमार्क होता है।
  • पीछे ISBN नंबर, संस्करण, प्रकाशन वर्ष और प्रकाशक की जानकारी दर्ज रहती है।
  • कागज की गुणवत्ता बेहतर और प्रिंट साफ होता है।
  • बाइंडिंग मजबूत होती है।

जबकि नकली किताबों में अक्सर पतला कागज, धुंधला प्रिंट और कमजोर बाइंडिंग देखने को मिलती है।

नकली किताबों से छात्रों का नुकसान

नकली किताबों का कारोबार सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य को प्रभावित करता है। ऐसी किताबों में कई बार अधूरा या गलत पाठ्यक्रम होता है, जिससे पढ़ाई पर असर पड़ता है। इसके अलावा घटिया कागज और स्याही से छात्रों की आंखों और सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

मोटे मुनाफे के लिए फैल रहा नेटवर्क

सूत्रों के अनुसार डुप्लीकेट किताबों की छपाई में लागत कम आती है, इसलिए इन्हें सस्ते में तैयार कर बाजार में बेचा जाता है। अधिक मुनाफे के लालच में दुकानदारों को भी ज्यादा कमीशन दिया जाता है, जिससे कई जगह बिना जांच के नकली किताबें बाजार में पहुंच जाती हैं।

फिलहाल पुलिस, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

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