विधानसभा बर्खास्त कर्मचारियों के समर्थन में आए पूर्व सीएम हरीश रावत, कही ये बात

2022 में विधानसभा से बर्खास्त कर्मचारियों के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत भी मैदान में उतर चुके है। उन्होंने इन कर्मचारियों के बर्खास्त होने को लेकर सवाल उठाए है। दरअसल पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की जिसमें  उन्होंने लिखा है कि अगर राज्य गठन से लेकर  2014 तक के कर्मचारियों की नियुक्ति वैध है तो बाद वालों को अवैध कैसे, यदि बाद वाले कर्मचारियों के खिलाग कार्रवाई हुई है तो पहले वाले कर्मचारियों को भी बर्खास्त कर न्याय किया जाए।

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हरीश रावत ने लिखा है कि राज्य विधानसभा अस्तित्व में आने के बाद से विधानसभा अध्यक्ष और सरकार की सहमति से तय नियमावली के तहत नियुक्त किए गए कर्मचारी काम करते आ रहे है। हर स्पीकर ने अपने कार्यकाल में  ऐसी नियुक्तियां की ऐसी नियुक्तियां 2021 से 22 तक तत्कालीन विधानसभा के कार्यकाल तक हुई। जिसके बाद फिर अचानक से सवाल उठा है की यह नियुक्तियां वैध नहीं  है।एक समान प्रक्रिया के तहत नियुक्त लोगों में से 2014 के बाद जितने भी लोग नियुक्त हुए थे उन सभी को विधानसभा की सेवाओं से बर्खास्त कर दिया गया। पांच साल सेवा करने के बाद कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया जिसके बाद बर्खास्त कर्मचारी अपनी बहाली को मांग को लेकर हाई कोर्ट  की शरण ली और एक लंबी कानूनी प्रक्रिया को झेल रहे हैं

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कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है। अगर कोई त्रुटियां भी है तो सरकार को इसका निराकरण  करना चाहिए। वह विधान सभा का कर्मचारी है, वह राज्य का कर्मचारी है। इन बर्खास्त कर्मचारियों की अपनी कोई भूल नहीं है, उन्होंने कुछ तथ्य छुपाए नहीं है उन्हें एक सिस्टम के तहत नियुक्ति दी गई है। यही कारण है की पहले विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल से को नियुक्ति की परंपरा चली आई थी  उसी परंपरा के तहत यह कर्मचारी 2022 तक नियुक्त हुए है।

यदि कहीं नियुक्तियों में कुछ पारदर्शिता नहीं है तो उसके तथ्य जुटा कर नियुक्त विशेष पर कार्रवाई की जा सकती है। यदि यह गलत प्रक्रिया से नियुक्त हुए है तो को प्रारंभ में नियुक्त हुए है उन्हें भी बर्खास्त किया जाए। कुछ कर्मचारियों को छोड़ना और कुछ को दंडित करना सही नहीं है।

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