देहरादून: Uttarakhand में उद्योगों के लिए बिजली बिलिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ लागू करते हुए बिजली दरों को अब दिन के अलग-अलग समय के अनुसार तीन श्रेणियों में विभाजित कर दिया है। इस नई व्यवस्था का सीधा असर एलटी (LT) और एचटी (HT) उद्योगों पर पड़ेगा।
अब उद्योगों का बिजली बिल केवल खपत (Units) पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि बिजली का उपयोग किस समय किया गया।
टाइम ऑफ डे टैरिफ: तीन हिस्सों में बंटा दिन
नई व्यवस्था के तहत पूरे दिन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
1. पीक आवर्स (सबसे महंगी बिजली)
- सर्दियों में: सुबह 6 बजे से 9 बजे तक और शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक
- गर्मियों में: केवल शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक
इस दौरान बिजली की मांग अधिक होने के कारण दरें सबसे ज्यादा रहेंगी।
2. सोलर आवर्स (सबसे सस्ती बिजली)
- सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक
इस समय सौर ऊर्जा की उपलब्धता अधिक होने के कारण बिजली दरें सबसे कम रखी गई हैं।
3. नॉर्मल आवर्स (सामान्य दरें)
- देर रात और दोपहर के कुछ घंटे
इस अवधि में बिजली की दरें सामान्य रहेंगी।
उद्योगों के लिए नई बिजली दरें (₹ प्रति यूनिट)
| श्रेणी | नॉर्मल आवर्स | पीक आवर्स | सोलर आवर्स |
|---|---|---|---|
| LT इंडस्ट्री | ₹5.75 | ₹7.48 | ₹4.46 |
| HT इंडस्ट्री | ₹6.85 | ₹8.91 | ₹5.31 |
| HT इंडस्ट्री (50%+ लोड) | ₹6.60 | ₹8.58 | ₹5.12 |
मीटर रीडिंग और बिलिंग में भी बदलाव
नई प्रणाली के तहत:
- मीटर रीडिंग अब केवल MRI (मीटर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट) के जरिए ही ली जाएगी
- इसमें लोड सर्वे और छेड़छाड़ की रिपोर्ट भी शामिल होगी
- उपभोक्ता अपने बिल के साथ MRI सारांश रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे
- ₹15 अतिरिक्त देकर डिटेल लोड सर्वे रिपोर्ट भी मंगाई जा सकती है
यदि किसी उद्योग का लोड बहुत कम या शून्य है, तो UPCL बाहरी लोड जोड़कर रीडिंग तैयार करेगा।
उद्योगों पर क्या होगा असर?
- उद्योग अब सोलर आवर्स में काम बढ़ाकर बिजली बिल कम कर सकते हैं
- पीक आवर्स में उपयोग कम करने से खर्च में बड़ी बचत संभव
- नई व्यवस्था से ऊर्जा प्रबंधन और प्लानिंग को बढ़ावा मिलेगा











Leave a Reply