PG डॉक्टर की मौत से हड़कंप: आखिरी रात क्या हुआ था तन्वी के साथ?

देहरादून। श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज की पीजी डॉक्टर तन्वी की संदिग्ध मौत के मामले ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला आत्महत्या है या इसके पीछे कोई अन्य कारण—इसकी निष्पक्ष और गहन जांच की मांग तेज हो गई है।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना से पहले न तो डॉक्टर तन्वी और न ही उनके परिजनों द्वारा किसी प्रकार की लिखित शिकायत पुलिस, प्रशासन या कॉलेज प्रबंधन को दी गई थी। इसके साथ ही घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है, जिससे संदेह और गहरा गया है।

बताया जा रहा है कि डॉक्टर तन्वी अपनी पीजी पढ़ाई पूरी करने के करीब थीं और लगभग दो महीने बाद अपनी सीनियर रेजिडेंसी (एसआरशिप) शुरू करने वाली थीं। ऐसे में अचानक उठाया गया यह कदम कई सवाल खड़े करता है।

घटना वाली रात उनकी ड्यूटी जनरल शिफ्ट में थी। तड़के करीब 3 बजे उनके परिजन उन्हें ब्रॉट डेड अवस्था में इमरजेंसी लेकर पहुंचे। इससे पहले उनकी लोकेशन, गतिविधियों और सीसीटीवी फुटेज की जांच को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस बीच यह भी सामने आया है कि डॉक्टर तन्वी पिछले कुछ समय से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज करा रही थीं। दो वर्ष पूर्व भी उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसमें उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा था। 31 दिसंबर 2025 को भी उन्होंने इसी तरह का प्रयास किया था।

कॉलेज प्रशासन के अनुसार, तन्वी पढ़ाई में अच्छी थीं और संस्थान द्वारा उन्हें हर संभव सहयोग दिया जा रहा था। उनकी मानसिक स्थिति की जानकारी उनके अभिभावकों को भी थी और वे नियमित रूप से उनका उपचार करवा रहे थे। यहां तक कि अभिभावकों ने कॉलेज प्रशासन को लिखित सहमति भी दी हुई थी।

मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि डॉक्टर तन्वी को किसी से, विशेषकर विभागाध्यक्ष या कॉलेज से कोई शिकायत थी, तो इसकी कोई औपचारिक शिकायत पहले क्यों नहीं की गई। साथ ही, सोशल मीडिया के इस दौर में इतनी गंभीर बात का कहीं उल्लेख न होना भी कई सवाल खड़े करता है।

घटना के बाद परिजनों द्वारा विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रियंका पर आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन अब तक इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। ऐसे में यह भी जांच का विषय बन गया है कि आखिर किन परिस्थितियों में यह नाम सामने आया।

एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को पत्र के माध्यम से दी है और संबंधित मेडिकल दस्तावेज भी सौंपे हैं।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति को दूर किया जा सके।

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