मूल निवास–भू कानून समन्वय संघर्ष समिति उत्तराखंड के बैनर तले गांधी पार्क में विभिन्न संगठनों और क्षेत्रीय समूहों ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया।
मूल निवास और भूमि अधिकारों के लिए आंदोलन का नया चरण शुरू
धरने में जुटे लोगों ने साफ कहा कि अब यह लड़ाई केवल आवाज़ उठाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे सीधे राजनीतिक रूप से लड़ा जाएगा।
समिति के संयोजक लुसुन टोडरिया ने कहा कि सरकार द्वारा लंबे समय से उपेक्षित इन मुद्दों को अब किसी भी कीमत पर अनदेखा नहीं होने दिया जाएगा।
“गांव-गांव अभियान चलाकर जनता को करेंगे जागरूक” — संयोजक लुसुन टोडरिया
लुसुन टोडरिया ने स्पष्ट किया कि समिति की टीम अब गांव-गांव जाकर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करेगी।
उनका कहना है—
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जो विधायक राज्यहित के मुद्दों पर खड़े नहीं उतरेंगे,
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जो मूल निवासियों के अधिकारों का समर्थन नहीं करेंगे,
उन्हें अब जनता के सामने बेनकाब किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य-विरोधी रवैया अपनाने वाले किसी भी नेता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पांचवी अनुसूची, भू-कानून और मूल निवास—क्यों बढ़ रही है मांग?
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पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी हस्तक्षेप पर रोक
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स्थानीय युवाओं के रोजगार अधिकार
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भूमि संरक्षण
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जनसांख्यिकीय असंतुलन रोकने की जरूरत
इन तमाम मुद्दों की वजह से इन मांगों ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी पकड़ी है।
आंदोलनकारियों का संदेश—“मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित किए बिना विकास अधूरा”
धरने में शामिल विभिन्न संगठनों का कहना था कि उत्तराखंड का भविष्य तभी सुरक्षित है जब मूल निवासियों के अधिकार, भू-कानून और संवैधानिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह संघर्ष आगे और अधिक व्यापक स्वरूप ले सकता है।












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