उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उधमसिंह नगर जिले में वर्ष 2021 की आपदा के दौरान आपदा राहत के 99 कुंतल अनाज के सड़ने और उसके बाद दोषियों से रिकवरी माफ किए जाने के मामले में बड़ा आदेश पारित किया है। कोर्ट ने कमिश्नर खाद्य विभाग, जिलाधिकारी उधमसिंह नगर, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी और डिस्पैच क्लर्क को 10 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: एक ऑफिस में दो डिस्पैच रजिस्टर कैसे?
सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी उधमसिंह नगर पूर्व आदेश के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुबह 10:30 बजे अदालत में उपस्थित हुए।
उन्होंने एक डिस्पैच रजिस्टर प्रस्तुत किया, जिसका न्यायालय ने अवलोकन किया।
इसके बाद जिलाधिकारी ने बताया कि एक और अलग डिस्पैच रजिस्टर भी है, जिसे अदालत में प्रस्तुत किया गया।
दोनों रजिस्टरों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने गंभीर अनियमितता पाई और सवाल उठाया—
“सभी कार्यालयों में केवल एक डिस्पैच रजिस्टर होता है, लेकिन यहां दो कैसे?”
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट स्पष्टीकरण के लिए 10 दिसंबर को उपस्थित होने के आदेश दिए।
पीआईएल में आरोप: 99 कुंतल राहत अनाज सड़ने से बड़ा नुकसान
हरिद्वार निवासी अभिजीत द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि—
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वर्ष 2021 में सरकार द्वारा सस्ता गल्ला योजना के तहत आपदा पीड़ितों के लिए भेजा गया 99 कुंतल अधिक अनाज रखरखाव के अभाव में सड़ गया।
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यह अनाज आपदा राहत सामग्री का हिस्सा था, जिसे वितरण किया जाना था।
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जांच के बाद डीएम उधमसिंह नगर ने दोषियों के खिलाफ रिकवरी के आदेश जारी किए।
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लेकिन खाद्य आपूर्ति कमिश्नर ने बाद में रिकवरी माफ कर दी, जो गंभीर लापरवाही है।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय से सस्ता गल्ला योजना और राहत सामग्री में हुए घोटाले की गहन जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और हुए वित्तीय नुकसान की वसूली की मांग की है।
इसके साथ ही राशन के अलावा अन्य धनराशि के दुरुपयोग की भी शिकायत की गई है।












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