दमकल और वन विभाग की टीम मौके पर
आग की सूचना मिलते ही वन महकमे की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू कर दिया। राहत की बात यह है कि जिस क्षेत्र में आग लगी, वहां न तो कोई बस्ती है और न ही घना जंगल या बड़े पेड़, जिससे किसी बड़े हादसे को फिलहाल टाला जा सका।
हर साल सूखी घांस में लगती है आग
शीतकाल के बाद उत्तराखंड में सूखी घांस और पत्तियों के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं हर साल बढ़ जाती हैं। हर वर्ष लाखों हेक्टेयर जंगल वनाग्नि की भेंट चढ़ जाते हैं।
हाईकोर्ट के सख्त निर्देश और वन विभाग की तैयारियां
ऊच्च न्यायालय पहले ही वन विभाग को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी कर चुका है। वन विभाग भी वनाग्नि रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू कर चुका है।
दिसंबर की शुरुआत में वनाग्नि की यह पहली बड़ी घटना होने के कारण फायर सीजन और ड्राई स्पेल में मामलों के बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
वन्यजीवों पर संकट
वनाग्नि से वन्यजीवों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। कई बार आग की चपेट में आकर वन्यजीवों की जान भी चली जाती है। कैमल्स बैक क्षेत्र में आग फैलने की रफ्तार को देखते हुए वन विभाग अलर्ट मोड पर है।
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