(कमल जगाती, नैनीताल)
नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव (14 अगस्त 2025) में कथित रूप से पांच बीडीसी सदस्यों के अपहरण, और एक मतपत्र में ओवरराइटिंग के गंभीर आरोपों पर दायर स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर आज उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अहम सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान पांचों सदस्य अदालत में पेश किए गए। मुख्य न्यायाधीश जे. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सदस्यों से सीधे सवाल पूछते हुए कड़ा रुख अपनाया।
“तुम लोग इस पद के योग्य नहीं”— कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
अदालत ने पाँचों सदस्यों के बयानों में विसंगतियां पाकर नाराजगी जताई। कोर्ट के अनुसार:
- सभी सदस्य अलग-अलग रामनगर पहुंचे,
- लेकिन बाद में एक ही घर (साली के घर) में साथ रहे,
- और वोटिंग वाले दिन पिकनिक मनाने चले गए।
खंडपीठ ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां जिला पंचायत सदस्य के पद की गरिमा के खिलाफ हैं। अदालत ने सदस्यों से उनकी नेपाल ट्रिप के बारे में भी विस्तृत जवाब मांगा।
जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर भी असंतोष, एसआईटी जांच की संभावना
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जांच अधिकारी की रिपोर्ट से भी असंतुष्ट दिखाई दिया। खंडपीठ ने रिपोर्ट पर फटकार लगाते हुए संकेत दिए कि अब इस मामले की जांच एसआईटी (Special Investigation Team) को सौंपी जा सकती है।
कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में जल्द ही कोई अहम फैसला आने की संभावना है।
ओवरराइटिंग विवाद: पुनः मतदान की मांग
इस पूरे मामले के साथ एक अन्य याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित है।
बीडीसी सदस्य पूनम बिष्ट ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि:
- जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में
- एक मतपत्र पर क्रमांक 1 को 2 में ओवरराइट कर
- उसे अमान्य घोषित कर दिया गया।
उन्होंने अदालत से अध्यक्ष पद के लिए पुनः मतदान (Re-Polling) कराए जाने की मांग की है।













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