उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की रीढ़ मानी जाने वाली महिला किसानों की आवाज़ को और मजबूत करने के उद्देश्य से किसान मंच ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। संगठन ने कुसुम लता बौड़ाई को प्रदेश प्रवक्ता – उत्तराखंड नियुक्त किया है। यह फैसला महिला कृषक समुदाय की समस्याओं को सरकारी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
महिला किसानों की भूमिका महत्वपूर्ण, लेकिन समस्याएँ अनसुनी
पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में खेती को जीवित रखने में महिलाओं की भूमिका सबसे अधिक है। बावजूद इसके, उनकी वास्तविक समस्याएँ और ज़मीनी चुनौतियाँ अक्सर सरकारी सिस्टम तक नहीं पहुँच पातीं। किसान मंच का कहना है कि इसी अंतर को भरने और महिला किसानों की आवाज़ को संस्थागत मजबूती देने के लिए यह नियुक्ति की गई है।
संगठन ने कहा — किसान हित में महत्वपूर्ण कदम
किसान मंच के संरक्षकों और पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वी.पी. सिंह की किसान-हितैषी सोच को आगे बढ़ाते हुए लगातार किसान अधिकारों के लिए संघर्षरत है।
“महिला कृषक हमारे पर्वतीय समाज की असली शक्ति हैं। उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देने के लिए कुसुम लता बौड़ाई जैसे सक्रिय और समझदार व्यक्तित्व को जिम्मेदारी सौंपना संगठन के लिए महत्वपूर्ण कदम है,”—संगठन ने कहा।
नव नियुक्त प्रवक्ता बोलीं — दुर्गम क्षेत्रों की महिलाओं की आवाज़ सरकार तक पहुँचाऊँगी
नव नियुक्त प्रदेश प्रवक्ता कुसुम लता बौड़ाई ने संगठन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे दुर्गम गांवों और पर्वतीय क्षेत्रों की महिला किसानों की समस्याएँ सरकार और नीति-निर्माताओं तक मजबूती से उठाएंगी।
उन्होंने कहा—
“पहाड़ की खेती आज भी महिलाओं के श्रम पर निर्भर है। अब ज़रूरत है कि उनके काम को सम्मान मिले और कृषि नीतियों में संवेदनशीलता बढ़ाई जाए।”
संगठन को उम्मीद—किसान मुद्दों को मिलेगा नया आयाम
किसान मंच का मानना है कि कुसुम लता बौड़ाई की सक्रियता और सामाजिक समझ से संगठन की आवाज़ और अधिक प्रभावशाली होगी। उम्मीद जताई गई है कि उनकी नियुक्ति से राज्य में किसानों, विशेषकर महिला कृषकों से जुड़े मुद्दों को नई गति और दिशा मिलेगी।













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