स्वास्थ्य विभाग ने तय की 2026 की कार्य योजनाएं, इन सुविधाएं को बढ़ाने का लक्ष्य, मंत्री के निर्देश

नए साल की कार्ययोजना तैयारकर लक्ष्यों को हासिल करेगा स्वास्थ्य विभाग, मंत्री ने अधिकारियों दिए निर्देश
देहरादून: साल 2026 के लिए विभागों की ओर से कार्य योजना तैयार की जा रही है. ताकि, अगले साल 2026 में लक्ष्यों को पूरा किया जा सके. इसी क्रम में उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने भी प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा और नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है. ताकि, प्रदेश के हर एक नागरिक को सुलभ, सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके. ऐसे में आप स्वास्थ्य विभाग, प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और विस्तार दिए जाने को लेकर कार्ययोजना तैयार करने जा रहा है.
साल 2026 चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है. क्योंकि, तमाम योजनाएं इस साल धरातल पर उतरेंगी. जिसमें मुख्य रूप से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में दो मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू हो जाएगा. जिसमें राजकीय मेडिकल कॉलेज पिथौरागढ़ और राजकीय मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर शामिल है. इन दोनों मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होने से जहां एक ओर मेडिकल एजुकेशन का दायरा बढ़ेगा तो वहीं जनता को भी मेडिकल कॉलेज चिकित्सालयों में बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी. इसके साथ ही उधम सिंह नगर जिले में ऋषिकेश एम्स का सैटेलाइट सेंटर भी इसी साल स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है.
उत्तराखंड में अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं. सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही उठता है कि अस्पताल तो है लेकिन वहां डॉक्टर मौजूद नहीं होते हैं. जिसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक जनवरी 2026 से प्रदेश के सभी अस्पतालों में बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य रूप से लागू कर दी है. ये व्यवस्था बेहतर ढंग से लागू हो और लगातार चलती रहे, इसके लिए महानिदेशालय और शासन स्तर पर हर महीने समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है, साथ ही बायोमेट्रिक हाजिरी के जरिए ही वेतन जारी करने की व्यवस्था को भी लागू किया गया है. अगर यह व्यवस्था सही ढंग से धरातल पर उतरती है तो इससे अस्पतालों में मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा.
उत्तराखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. इस चुनौती को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक अलग कैडर बनाने का निर्णय लिया है. साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत राजकीय मेडिकल कॉलेजों में तैनात मेडिकल फैकल्टी के लिए अलग से स्थानांतरण नीति भी बनाई जाएगी. इसके साथ ही साल 2026 में सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए बड़े स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी.
साल 2026 में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में डॉक्टर्स समेत मेडिकल स्टाफ की बड़े स्तर पर भर्ती होनी है. जिसमें स्वास्थ्य विभाग के तहत चिकित्साधिकारियों के खाली पड़े 287 पदों पर नियुक्ति की जाएगी. इसके साथ ही नर्सिंग अधिकारी के खाली 103, डेंटल हाइजीनिस्ट के 30 और एएनएम के 180 पदों पर भर्ती की जाएगी. इसी तरह चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत नर्सिंग अधिकारियों के 587 पदों पर नियुक्ति की जाएगी. यही नहीं, आईपीएचएस मानकों के अनुसार हर अस्पतालों में तकनीकी संवर्ग के पदों यानी लैब तकनीशियन, ओटी तकनीशियन, डायलिसिस तकनीशियन, ईसीजी तकनीशियन, एक्स-रे तकनीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट के पदों को सृजित कर भर्ती की जाएगी. जबकि, आउटसोर्स के जरिए हर अस्पतालों में करीब 2000 वार्ड ब्वॉय की भी भर्ती की जाएगी.
ज्यादा जानकारी देते हुए स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि साल 2026 में प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया जाएगा. इसके लिए सभी जिलों के लिए अलग-अलग ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी. ताकि, अस्पतालों में जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके. इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों में उचित सफाई व्यवस्था, मेडिकल कॉलेजों एवं जिला चिकित्सालयों में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मेन्यू तय किया जाएगा, अस्पतालों में हर दिन अनिवार्य रूप से चादर बदली जाएगी. प्रदेश में तमाम अस्पतालों को मानकों के अनुरूप उच्चीकृत किया जाएगा. जिला चिकित्सालय से लेकर सीएससी तक विशेषज्ञ डॉक्टर्स की तैनाती, एमआरआई, सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स रे समेत आधुनिक उपकरणों को उपलब्ध कराया जाएगा.
स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि साल 2026 अपार संभावनाओं का साल है. नए साल में उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत किया जाएगा. जिसके तहत अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता, मानव संसाधन की पूर्ति, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार और चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ किया जाएगा. ताकि, आम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा सके और उन्हें स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध हों.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!