यूसीसी के एक साल: उत्तराखंड सरकार का दावा, जनता ने खुले दिल से अपनाया कानून

देहरादून।  उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लागू हुए एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। 27 जनवरी 2025 को राज्य में यूसीसी कानून लागू किया गया था और 27 जनवरी 2026 को इसके एक वर्ष पूरे हो जाएंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यूसीसी को लेकर प्रदेश की जनता में सकारात्मक माहौल है और नागरिक बड़ी संख्या में पंजीकरण के लिए आगे आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी कानून नागरिकों को सुरक्षा, समान अधिकार और सम्मान की गारंटी देता है। खास तौर पर महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में यह कानून मील का पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने बताया कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण को लेकर जागरूकता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।

विधानसभा चुनाव के संकल्प से कानून तक का सफर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही यूसीसी लागू करने का निर्णय लिया। सभी कानूनी औपचारिकताओं और जनमत प्रक्रिया के बाद 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में यूसीसी कानून प्रभावी कर दिया गया।

विवाह पंजीकरण में 24 गुना तक बढ़ोतरी
यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण के आंकड़ों में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक मात्र छह महीनों में तीन लाख से अधिक विवाह पंजीकरण हुए।
वहीं, वर्ष 2010 में लागू पुराने कानून के तहत 26 जनवरी 2025 तक कुल लगभग 3.30 लाख विवाह पंजीकरण ही हो पाए थे।
पुराने कानून में प्रतिदिन औसतन 67 विवाह पंजीकरण होते थे, जबकि यूसीसी लागू होने के बाद यह औसत बढ़कर 1634 प्रतिदिन तक पहुंच गया है।

सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री धामी ने यूसीसी को सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में उठाया गया साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताया। यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों को—बिना किसी भेदभाव के—समान अधिकार प्रदान करना है।

यूसीसी के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और उनसे जुड़े मामलों को एक समान कानूनी ढांचे में शामिल किया गया है। कानून में विवाह की न्यूनतम आयु तय की गई है और सभी धर्मों के लिए तलाक एवं अन्य प्रक्रियाओं में समान और कड़े प्रावधान किए गए हैं।

महिलाओं को कुप्रथाओं से राहत
यूसीसी लागू होने से महिलाओं को बहुविवाह और हलाला जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है। सरकार का मानना है कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के साथ-साथ समाज में समानता और पारदर्शिता को भी बढ़ावा देगा।

एक वर्ष के अनुभव के आधार पर राज्य सरकार का दावा है कि यूसीसी को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक प्रभाव और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।

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