उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: PWD और सिंचाई विभाग कर्मियों की पेंशन रोकने के आदेश पर स्टे

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और सिंचाई विभाग के नियमित एवं वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन बंद करने से जुड़े राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वित्त विभाग के 16 जनवरी के उस आदेश को फिलहाल प्रभावहीन कर दिया है, जिसके तहत वर्ष 2016 के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को पेंशन के दायरे से बाहर कर दिया गया था।

क्या था सरकार का आदेश?

वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि:

  • 1 अक्टूबर 2005 के बाद नियमित हुए वर्कचार्ज कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
  • जिन कर्मचारियों को पहले से पेंशन मिल रही थी, उनकी पेंशन भी तत्काल प्रभाव से बंद की जाए।
  • सेवारत कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से जोड़ा जाए।

इस आदेश के बाद कर्मचारियों में व्यापक असंतोष देखा गया और मामला न्यायालय पहुंचा।

कोर्ट में क्या दलील दी गई?

सिंचाई विभाग के नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी गुलाब सिंह तोमर ने खंडपीठ में याचिका दाखिल कर कहा कि सरकार का आदेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के विपरीत है।

याचिका में विशेष रूप से 2018 में दिए गए Prem Singh vs State of Uttar Pradesh के फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने वर्कचार्ज सेवा अवधि को जोड़ते हुए कर्मचारियों को पेंशन व अन्य सेवा लाभ देने का निर्देश दिया था।

राज्य सरकार ने अपने आदेश के समर्थन में 2023 के Udayraj Singh vs State of Bihar मामले का उल्लेख किया। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि 2018 का फैसला तीन जजों की खंडपीठ द्वारा दिया गया था, जबकि 2023 का निर्णय दो जजों की पीठ का था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बड़े बेंच का फैसला ही प्रभावी माना जाएगा।

हाईकोर्ट का रुख

खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के तर्कों को गंभीर मानते हुए वित्त विभाग के 16 जनवरी के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे फिलहाल PWD और सिंचाई विभाग के नियमित व वर्कचार्ज कर्मचारियों को राहत मिली है।

इससे पहले शीतकालीन अवकाश के दौरान भी एक अन्य पीठ ने समान मामले में अंतरिम राहत दी थी, जबकि एकलपीठ ने सरकार से जवाब तलब किया था।

कर्मचारियों को क्या राहत?

  • जिन कर्मचारियों की पेंशन बंद की गई थी, उन्हें फिलहाल राहत मिलेगी।
  • सेवारत कर्मचारियों को NPS में अनिवार्य रूप से शामिल करने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ेगा।
  • अंतिम निर्णय तक पुरानी पेंशन से जुड़े अधिकारों की स्थिति यथावत रहेगी।

आगे क्या?

अब राज्य सरकार को कोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई में विस्तृत बहस के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जो हजारों कर्मचारियों के भविष्य पर असर डाल सकता है।

 

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