धौलास भूमि विवाद में बड़ा एक्शन: 161 लोगों को नोटिस, पूर्व सैनिकों सहित खाताधारक आमने-सामने

देहरादून। राजधानी देहरादून के धौलास क्षेत्र में स्थित विवादित भूमि मामले ने नया मोड़ ले लिया है। भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के पास स्थित जमीन प्रकरण में विकासनगर कोर्ट ने 161 खाताधारकों को संयुक्त रूप से नोटिस जारी कर 27 फरवरी को दस्तावेजों सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

नोटिस जारी होने के बाद सभी भू-स्वामियों ने एकजुट होकर कानूनी तरीके से अपनी बात रखने और न्यायालय में मजबूती से पक्ष रखने का निर्णय लिया है। खाताधारकों का कहना है कि उन्होंने भूमि की खरीद पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत की है और उनके पास रजिस्ट्री, म्यूटेशन सहित सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं।

“वैधानिक प्रक्रिया से खरीदी जमीन, अब क्यों उठ रहे सवाल?”

भू-स्वामियों का कहना है कि जमीन की खरीद से पहले उन्होंने रजिस्ट्रार कार्यालय, पटवारी, तहसील और एसडीएम कार्यालय से सभी आवश्यक जांच-पड़ताल करवाई थी। संबंधित विभागों से अनुमति और प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही रजिस्ट्री की गई थी।

स्थानीय खाताधारक गौरव ढौंडियाल के अनुसार, हाईकोर्ट से कृषि भूमि के रूप में बिक्री की अनुमति मिलने के बाद ही जमीन खरीदी गई थी। ऐसे में अचानक नोटिस जारी होना उनके लिए आश्चर्यजनक है।

40 पूर्व सैनिक भी कार्रवाई की जद में

इस मामले में करीब 40 पूर्व सैनिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी सेवा निवृत्ति के बाद की बचत से धौलास में जमीन खरीदी थी।

सेना से सेवानिवृत्त मनबर सिंह रावत का कहना है कि सभी भू-स्वामियों ने नियमों के तहत जमीन खरीदी है। सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी और स्वीकृति के बाद ही रजिस्ट्री और म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी हुई थी। अब उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।

एक अन्य पूर्व सैनिक रवि (नाम परिवर्तित) ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में लगभग 38 वर्षों तक सेवा देने के बाद अपने बच्चों के भविष्य के लिए करीब 200 गज भूमि खरीदी थी। उनके अनुसार, प्रशासनिक अनुमति के बाद ही यह क्रय-विक्रय हुआ था और सभी दस्तावेज विधिवत उपलब्ध हैं।

विवाद को सांप्रदायिक रंग देने के आरोप

कुछ भू-स्वामियों का आरोप है कि इस भूमि विवाद को एक विशेष समुदाय से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि अधिकांश खाताधारक स्थानीय निवासी, पर्वतीय मूल के परिवार और पूर्व सैनिक हैं। उनका कहना है कि भूमि विवाद को किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।

भू-स्वामियों ने स्पष्ट किया कि वे इस पूरे मामले में न्यायालय का सम्मान करते हैं और तय तारीख पर अपने सभी साक्ष्यों के साथ उपस्थित होंगे।

27 फरवरी को दस्तावेजों की जांच

विकासनगर कोर्ट द्वारा जारी नोटिस में सभी खाताधारकों को 27 फरवरी को अपने दस्तावेजों की जांच और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। इसके बाद ही मामले की अगली सुनवाई की दिशा तय होगी।

भू-स्वामियों ने कहा है कि वे एक साझा मंच बनाकर सामूहिक रूप से कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का सहारा लेंगे।

(नोट: मामला न्यायालय में विचाराधीन है। सभी पक्षों का अंतिम पक्ष और निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।)

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