सैलजा का ‘एकता मंत्र’: क्या खत्म होगी कांग्रेस की खींचतान

रुद्रपुर/देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी के बीच अब पार्टी प्रभारी कुमारी सैलजा का पांच दिवसीय दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। आज उनका पहला पड़ाव रुद्रपुर में होगा, जहां से वह प्रदेशभर में संगठन को मजबूत करने और अंदरूनी मतभेदों को कम करने की कोशिश शुरू करेंगी।

कांग्रेस में गुटबाजी कम करने की बड़ी कोशिश

प्रदेश कांग्रेस में पिछले कुछ समय से नेताओं के बीच बयानबाजी और खींचतान खुलकर सामने आई है। ऐसे में सैलजा के इस दौरे को “डैमेज कंट्रोल मिशन” के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच उम्मीद है कि प्रभारी की सख्ती और मार्गदर्शन से गुटबाजी की आंच कुछ हद तक ठंडी पड़ेगी।

इन जिलों में होंगी अहम बैठकें

प्रभारी अपने दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण जिलों में बैठकें करेंगी, जिनमें शामिल हैं:

  • रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर)
  • हल्द्वानी (नैनीताल)
  • कोटद्वार (पौड़ी)
  • हरिद्वार
  • देहरादून

इन बैठकों में जिला, महानगर और प्रदेश स्तर के नेताओं के साथ आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी।

हरीश रावत की भूमिका पर सस्पेंस

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत फिलहाल 15 दिन के अवकाश पर हैं और उनकी बैठक में भागीदारी को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
हालांकि उन्होंने कहा है कि वह एक कार्यकर्ता के रूप में प्रभारी का स्वागत करने जरूर जाएंगे, लेकिन सक्रिय राजनीति में वापसी को लेकर उन्होंने अभी पत्ते नहीं खोले हैं।

विवादों ने बढ़ाई थी पार्टी की मुश्किलें

हाल ही में कई घटनाओं ने कांग्रेस के भीतर मतभेद को और बढ़ाया है:

  • 2022 चुनाव में निर्दलीय लड़े नेताओं को पार्टी में शामिल करने पर विवाद
  • वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी
  • संगठनात्मक निर्णयों पर असहमति

इन सबके चलते पार्टी की छवि पर असर पड़ा, जिसे सुधारना अब प्रभारी की प्राथमिकता होगी।

प्रदेश नेतृत्व ने की पूरी तैयारी

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार, दौरे की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सभी वरिष्ठ नेताओं को बैठकों में अनिवार्य रूप से शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संगठनात्मक एकजुटता का संदेश दिया जा सके।

क्या बदलेगा उत्तराखंड कांग्रेस का माहौल?

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि इस दौरे में ठोस फैसले लिए गए और नेताओं को एक मंच पर लाया गया, तो यह कांग्रेस के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
आने वाले चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं में विश्वास बहाल करना इस दौरे का मुख्य उद्देश्य है।

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