महिला आरक्षण पर उत्तराखंड विधानसभा में घमासान, हंगामे से थमी कार्यवाही

देहरादून में मंगलवार को आयोजित उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण का मुद्दा जोरदार तरीके से छाया रहा। Pushkar Singh Dhami की ओर से महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने का भरोसा दिलाया गया, वहीं विपक्षी Indian National Congress ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए सदन में तीखा विरोध दर्ज कराया। पूरे दिन पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी का दौर चलता रहा, जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही को शाम छह बजे तक स्थगित करना पड़ा।

सत्र के दौरान माहौल उस समय और गरमा गया जब मंत्री सौरभ बहुगुणा अपनी बात रख रहे थे। इसी बीच कांग्रेस विधायकों ने अचानक विरोध शुरू कर दिया और वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। करीब बीस मिनट तक चले इस हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित रही। सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर महिला आरक्षण को लागू करने में देरी का आरोप जड़ा।

बाहर भी इस मुद्दे को लेकर सियासी तापमान कम नहीं था। विधानसभा कूच कर रहीं महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। Jyoti Rautela समेत कई महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद सड़कों पर प्रदर्शन और तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि महिला आरक्षण को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।

विधानसभा के भीतर नेता प्रतिपक्ष Yashpal Arya ने सरकार को घेरते हुए कहा कि 2023 में पारित कानून को अब तक लागू नहीं किया गया है और इसे जानबूझकर टाला जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून पहले ही पास हो चुका है तो इसे लागू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। उनका कहना था कि सरकार महिलाओं को अधिकार देने के बजाय केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को टाल रही है।

वहीं, भाजपा इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पर लगातार दबाव बनाए रखने की रणनीति में नजर आ रही है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष Mahendra Bhatt ने संकेत दिए हैं कि नगर निगमों, जिला पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों तक निंदा प्रस्ताव लाकर कांग्रेस को घेरा जाएगा। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष ने मातृशक्ति का अपमान किया है और पार्टी इस मुद्दे पर किसी भी स्तर पर चुप नहीं बैठेगी।

महिला आरक्षण को लेकर चल रही इस राजनीतिक खींचतान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में बना रहेगा। जहां एक ओर सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष तत्काल प्रभाव से इसे लागू करने की मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि यह बहस कब और किस निष्कर्ष तक पहुंचती है।

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