देहरादून/. अब अगर किसी आईएएस या अन्य लोकसेवक पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो उससे जुड़ी जानकारी आम नागरिक RTI (सूचना का अधिकार) के तहत प्राप्त कर सकेंगे। राज्य सूचना आयोग के एक महत्वपूर्ण फैसले ने पारदर्शिता को और मजबूत कर दिया है।
क्या कहा आयोग ने?
राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि:
- यदि किसी लोकसेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज हो चुका है, तो उसकी जानकारी दी जा सकती है
- यदि राज्य सरकार द्वारा जांच की अनुमति दी गई है, तो भी जानकारी RTI में उपलब्ध होगी
- यदि मामला अदालत में पहुंच चुका है, तो उससे जुड़ी जानकारी भी साझा की जा सकती है
यह फैसला संजीव चतुर्वेदी की अपील पर सुनाया गया।
कब रोकी जा सकती है जानकारी?
आयोग ने यह भी साफ किया कि हर जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी:
- अगर मामला जांच के अधीन है और जानकारी देने से जांच प्रभावित हो सकती है
तो विभाग सूचना देने से मना कर सकता है - फाइल नोटिंग (आंतरिक टिप्पणियां)
इसे विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए सार्वजनिक करने से इंकार किया गया
दूसरी एजेंसी से जुड़ी जानकारी का नियम
अगर कोई जानकारी किसी दूसरी जांच एजेंसी से संबंधित है, तो:
उसे साझा करने से पहले संबंधित एजेंसी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा
क्या बदलेगा इस फैसले से?
अब तक यह माना जाता था कि लोकसेवकों की जानकारी सार्वजनिक करने से उन पर दबाव बन सकता है।
लेकिन इस फैसले के बाद:
भ्रष्ट अधिकारियों पर पारदर्शिता बढ़ेगी
आम जनता को ज्यादा अधिकार मिलेगा
जवाबदेही तय करना आसान होगा












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