हरिद्वार। जिले में पीएम पोषण योजना के तहत संचालित मदरसों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रारंभिक जांच में 11 मदरसों में 206 से अधिक बच्चों के फर्जी पंजीकरण पकड़े गए हैं। कई बच्चों के नाम एक ही समय में अलग-अलग मदरसों में दर्ज पाए गए, जिससे सरकारी धनराशि लेने का खेल उजागर हुआ है।
सबसे चौंकाने वाला मामला लक्सर क्षेत्र में सामने आया, जहां तीन मदरसों की मान्यता पर अलग-अलग स्थानों में कुल छह मदरसे संचालित किए जा रहे थे। प्रशासन की जांच में जिले के 131 मदरसों में से 23 मदरसे संदिग्ध पाए गए हैं। फिलहाल 11 मदरसों की पीएम पोषण योजना की मार्च और अप्रैल माह की धनराशि पर रोक लगा दी गई है।
जांच में सामने आया कि कुछ मदरसों ने वास्तविक छात्र संख्या से अधिक बच्चों का रिकॉर्ड तैयार किया था, ताकि पीएम पोषण योजना के तहत ज्यादा सरकारी राशि हासिल की जा सके। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कक्षा 1 से 5 तक प्रति छात्र करीब 7 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक करीब 10 रुपये प्रतिदिन भोजन मद में दिए जाते हैं। इसी योजना का फायदा उठाने के लिए फर्जी छात्र संख्या दर्शाने का मामला सामने आया।
प्रारंभिक जांच के दौरान कई मदरसों के दस्तावेज, उपस्थिति पंजिका और छात्र संख्या में भारी अंतर पाया गया। कुछ बच्चों के नाम दो-दो मदरसों में दर्ज मिले, जिससे साफ हो गया कि सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर धनराशि लेने की कोशिश की गई।
वहीं, सुल्तानपुर स्थित जशोधरपुर गांव के केजीएन हाईस्कूल में शनिवार को अल्पसंख्यक बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह ने मदरसा संचालकों की बैठक लेकर मान्यता संबंधी नियमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी मदरसे शिक्षा विभाग से मान्यता लेकर ही संचालित किए जाएं। धार्मिक शिक्षा के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से भी मान्यता ली जा सकती है।
डीईओ बेसिक अमित चंद ने कहा कि जिले के सभी मदरसों की चरणबद्ध तरीके से जांच कराई जा रही है। जिन मदरसों में गड़बड़ी मिली है, वहां पीएम पोषण योजना की धनराशि रोक दी गई है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।











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