उत्तराखंड शिक्षा विभाग में दिव्यांग कोटे से नौकरी पाने वाले शिक्षकों की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य मेडिकल बोर्ड की जांच में अब तक 36 ऐसे शिक्षक पकड़े गए हैं, जिनके दिव्यांग प्रमाण-पत्र संदिग्ध या गलत पाए गए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही जांच के तहत 794 शिक्षक-कर्मचारियों को चिह्नित किया गया था, जिनमें से 587 ही मेडिकल बोर्ड के सामने पेश हुए। ऋषिकेश AIIMS में हुई जांच के दौरान कई चौंकाने वाले मामले सामने आए।
▪️ कुछ शिक्षक ऐसे मिले, जिनके दिव्यांग प्रमाणपत्र की वैधता 2020 में ही समाप्त हो चुकी थी, लेकिन वे पुराने प्रमाणपत्र लेकर जांच में पहुंच गए।
▪️ चमोली के एक शिक्षक का अस्थि विकार प्रमाणपत्र 1995 का मिला।
▪️ कई प्रमाणपत्रों में दिव्यांगता केवल 30% पाई गई, जबकि सरकारी नौकरी में दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 40% दिव्यांगता जरूरी है।
▪️ जांच में दो ऐसे मामले भी सामने आए, जहां दिव्यांग बेटा था लेकिन सूची में पिता का नाम दर्ज कर दिया गया।
▪️ कुछ अभ्यर्थियों ने दिव्यांग कोटे से नौकरी ली ही नहीं, फिर भी उनके नाम सूची में शामिल कर दिए गए।
जांच से छूटे शिक्षकों को 11 मई को दोबारा AIIMS में मेडिकल जांच का मौका दिया जाएगा। सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को संबंधित शिक्षकों को तत्काल सूचना देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
अपर निदेशक माध्यमिक परमेंद्र कुमार बिष्ट ने पुष्टि की है कि मेडिकल बोर्ड की जांच लगातार जारी है।











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