औद्योगिक हादसे में कटा 23 वर्षीय युवक का पैर, मैक्स अस्पताल देहरादून में सफल सर्जरी से दोबारा जोड़ा

देहरादून। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के डॉक्टरों ने एक 23 वर्षीय युवक का औद्योगिक दुर्घटना में कटा हुआ पैर सफलतापूर्वक दोबारा जोड़कर उसकी जान और पैर दोनों बचा लिए। यह हादसा तब हुआ जब युवक एक औद्योगिक दुर्घटना में एक्सकेवेटर (खुदाई मशीन) की कन्वेयर बेल्ट पर गिर गया, जिससे उसका दाहिना पैर और पंजा पूरी तरह शरीर से अलग हो गया।

उत्तराखंड निवासी इस युवक को सबसे पहले पास के एक अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उसे मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून भेजा गया। अस्पताल पहुंचने तक उसकी हालत गंभीर थी। काफी मात्रा में रक्तस्राव हो चुका था और उसका दाहिना पैर पूरी तरह कट चुका था, जिसे बर्फ से भरे एक बॉक्स में सुरक्षित रखकर अस्पताल लाया गया था।

अस्पताल की इमरजेंसी टीम ने तुरंत मरीज की स्थिति को संभाला। इसके बाद प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. चिरैल भाटिया तथा ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग की विशेषज्ञ टीम ने जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। लगभग आठ घंटे तक चले ऑपरेशन में टूटी हुई हड्डियों, रक्त वाहिकाओं, नसों, टेंडन और अन्य क्षतिग्रस्त ऊतकों को सावधानीपूर्वक जोड़कर पैर को दोबारा शरीर से जोड़ा गया।

सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में लगातार निगरानी में रखा गया। उपचार के दौरान घावों की देखभाल के साथ-साथ स्किन ग्राफ्टिंग जैसी प्रक्रियाएं भी की गईं, ताकि पैर सही तरीके से ठीक हो सके और उसमें रक्त प्रवाह सामान्य बना रहे। 14 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद मरीज को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई। फिलहाल उसका पैर और पंजा सुरक्षित हैं।

डॉक्टरों के अनुसार आगे भी मरीज की नियमित जांच की जाएगी और स्वस्थ होने की प्रक्रिया के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त रिकंस्ट्रक्टिव प्रक्रियाएं भी की जाएंगी, ताकि वह भविष्य में बेहतर तरीके से चल-फिर सके।

इस मामले पर डॉ. चिरैल भाटिया ने कहा कि यह बेहद चुनौतीपूर्ण मामला था, जिसमें माइक्रोसर्जरी की उन्नत तकनीक और समय पर प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञता की आवश्यकता थी। उन्होंने बताया कि कटे हुए अंग को दोबारा जोड़ना केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसके बाद भी लगातार देखभाल, ऊतकों की स्थिति पर निगरानी और चरणबद्ध रिकंस्ट्रक्टिव उपचार की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा कि मरीज को सामान्य रूप से चलने-फिरने में समय लगेगा, लेकिन उसका पैर बच जाना शारीरिक और मानसिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यह सफल उपचार एक बार फिर दर्शाता है कि मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून गंभीर दुर्घटनाओं और ट्रॉमा मामलों के उपचार में विशेषज्ञता रखता है। यहां ऑर्थोपेडिक्स, रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और क्रिटिकल केयर जैसी उन्नत सुविधाओं के समन्वय से मरीजों को समग्र उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!