Dehradun News: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत देहरादून जिले में मतदाता सूची के सत्यापन और पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। अब तक जिले में 11,90,805 मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली गई है। वहीं, वर्ष 2003 की मतदाता सूची के विवरण में विसंगतियां पाए जाने या आवश्यक विवरण उपलब्ध न कराने पर 5,47,617 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।
जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के साथ बैठक कर Special Intensive Revision (SIR) की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राजनीतिक दलों से पुनरीक्षण प्रक्रिया में सहयोग करते हुए इसे निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की अपील की।
3.95 लाख मतदाताओं की सुनवाई पूरी
जिलाधिकारी ने बताया कि जारी किए गए 5,47,617 नोटिस में से 3,95,772 मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है, जबकि 1,52,170 मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।
प्रशासन का लक्ष्य है कि पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने और अपात्र या गलत तरीके से दर्ज नामों के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 39 हजार से अधिक आवेदन
21 अगस्त 2026 तक जिले में मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए प्रारूप-6 (Form-6) के माध्यम से 39,025 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
वहीं, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए प्रारूप-7 (Form-7) के तहत 10,235 दावे एवं आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य विवरण में संशोधन के लिए प्रारूप-8 (Form-8) के तहत 10,718 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
Form-6, Form-7 और Form-8 का मतलब
- Form-6: मतदाता सूची में नया नाम शामिल कराने के लिए।
- Form-7: मतदाता सूची से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए।
- Form-8: मतदाता सूची में दर्ज विवरण में संशोधन के लिए।
Form-7 की आपत्तियों पर होगी व्यक्तिगत सुनवाई
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि Form-7 के तहत प्राप्त सभी आपत्तियों पर संबंधित BLO (Booth Level Officer) द्वारा संबंधित व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नोटिस दिया जाएगा।
नोटिस मिलने के सात दिन बाद सुनवाई शिविर आयोजित किया जाएगा। बूथ स्तर पर आयोजित इन शिविरों में जिस मतदाता के खिलाफ आपत्ति दर्ज की गई है और आपत्तिकर्ता—दोनों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने से रोकना है।
यूपी और उत्तराखंड दोनों राज्यों में दर्ज 96,187 मतदाताओं का होगा सत्यापन
SIR के दौरान एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। जिले में 96,187 ऐसे मतदाता चिन्हित किए गए हैं, जिनका नाम उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज है।
ऐसे मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। प्रशासन के अनुसार इन मतदाताओं को स्वेच्छा से एक राज्य की मतदाता सूची में रहने का विकल्प दिया जाएगा। BLO घर-घर जाकर संबंधित मतदाताओं को इसकी जानकारी देंगे और उनकी इच्छा के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से अपील की कि जिन नागरिकों को SIR के तहत नोटिस जारी किए जा रहे हैं, उन्हें उनके Booth Level Agents (BLA) के माध्यम से संबंधित बूथ तक पहुंचने में सहयोग किया जाए।
उन्होंने कहा कि सभी दावों और आपत्तियों का निष्पक्ष, प्रभावी और पारदर्शी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
साथ ही जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि Form-7 में मिथ्या घोषणा या गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में ये अधिकारी और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, संयुक्त मजिस्ट्रेट डॉ. हर्षिता, सिटी मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, एसडीएम अपर्णा ढौंडियाल, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र प्रसाद देवली सहित विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में बीजेपी से अरविंद जैन, बीएसपी से सतेन्द्र सिंह, कांग्रेस से डॉ. जसविंदर सिंह, आम आदमी पार्टी से अशोक सेमवाल और कमल राणा सहित अन्य पदाधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
SIR क्या है?
SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया जाता है, नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, गलत या अपात्र प्रविष्टियों की जांच की जाती है और आवश्यक होने पर मतदाता सूची में संशोधन किया जाता है।













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