
बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर चक्रवाती तूफान का खतरा मंडराने लगा है। समुद्र में विकसित हो रहा कम दबाव का क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, यह मौसमी सिस्टम अगले कुछ घंटों में डिप्रेशन का रूप ले सकता है। इसके बाद 24 घंटों के भीतर इसके चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की संभावना जताई गई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:30 बजे यह सिस्टम दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के आसपास सक्रिय था। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है। मौसम प्रणाली पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रही है।
2 नवंबर को आंध्र प्रदेश तट के करीब पहुंचने का अनुमान
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए 2 नवंबर 2026 की शाम तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में आंध्र प्रदेश के तट के नजदीक पहुंच सकता है। फिलहाल इसकी तीव्रता और आगे की दिशा पर लगातार नजर रखी जा रही है। सिस्टम के चक्रवात में बदलने की स्थिति में इसके प्रभाव और संभावित खतरे को लेकर आगे चेतावनी जारी की जा सकती है।

अंडमान-निकोबार में बारिश और तेज हवाओं की आशंका
मौसम प्रणाली के प्रभाव से अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कई हिस्सों में बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। समुद्र में हलचल बढ़ने के साथ परिस्थितियां मध्यम से उग्र और कुछ समय के लिए बेहद उग्र हो सकती हैं।
इस दौरान दक्षिण-पूर्व से दक्षिणी दिशा की हवाएं 37 से 46 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। हवा के झोंकों की गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।
आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में बढ़ सकती है परेशानी
इस मौसमी सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में भी बारिश का खतरा बढ़ सकता है। संभावित चक्रवाती गतिविधियों को देखते हुए मछुआरों, किसानों और समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। समुद्र में जाने वाली नावों और जहाजों को भी मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
अक्टूबर-नवंबर में सक्रिय रहते हैं चक्रवाती सिस्टम
बंगाल की खाड़ी में अक्टूबर और नवंबर के दौरान कम दबाव के क्षेत्र तथा चक्रवाती प्रणालियां विकसित होना सामान्य मौसमी गतिविधियों का हिस्सा है। हालांकि, इनके मजबूत होने पर तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा पैदा हो सकता है।
फिलहाल मौसम विभाग इस सिस्टम की लगातार निगरानी कर रहा है। लोगों को मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट और चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है। चक्रवात की आशंका को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है, हालांकि अभी इसकी अंतिम तीव्रता और प्रभाव का आकलन आगे की स्थिति के आधार पर किया जाएगा।













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