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8 साल की नौकरी पर चला बर्खास्तगी का डंडा, हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य प्राधिकरण को घेरा

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण में आठ साल से कार्यरत एक कर्मचारी को सेवा से हटाए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने कर्मचारी की बर्खास्तगी को प्रथम दृष्टया उसके अधिकारों का हनन मानते हुए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक को 19 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। निदेशक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होना होगा।

मामला राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण में कार्यरत पंकज साह की सेवा समाप्ति से जुड़ा है। पंकज साह पिछले आठ वर्षों से प्राधिकरण में अपनी सेवाएं दे रहे थे। प्राधिकरण ने 7 जनवरी 2026 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इसके खिलाफ पंकज साह ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी।

याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि प्राधिकरण ने उन्हें पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब भी दिया था। इसके बावजूद सेवा से बर्खास्तगी जैसा कठोर कदम उठाने से पहले उनका पक्ष उचित तरीके से नहीं सुना गया।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि लंबे समय से प्राधिकरण में कार्यरत कर्मचारी को इस तरह सेवा से हटाकर उसकी जगह किसी दूसरे कर्मचारी को नियुक्त करना उसके अधिकारों का हनन हो सकता है।

न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक को 19 नवंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट के इस रुख के बाद अब सबकी निगाहें 19 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

 

 

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