नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल में चर्चित हत्याकांड मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रशांत जोशी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नैनीताल ने धर्म और पहचान छिपाकर शादी करने तथा पत्नी की हत्या के मामले में अभियुक्त ऋषभ तिवारी उर्फ ‘इमरान’ को दोषी करार दिया है। अदालत अब 26 फरवरी को सजा सुनाएगी।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर निवासी श्वेता शर्मा ने मल्लीताल कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि अभियुक्त ऋषभ तिवारी उर्फ ‘इमरान’ अपनी पत्नी दीक्षा और एक मित्र अलमास के साथ 14 अगस्त को नैनीताल घूमने आया था।
तीनों ने मल्लीताल क्षेत्र के एक होटल में दो कमरे लिए। 16 अगस्त को जब दीक्षा और अलमास से संपर्क नहीं हो पाया तो श्वेता शर्मा ने फोन किया। अभियुक्त का मोबाइल स्विच ऑफ था, जबकि दीक्षा ने फोन रिसीव नहीं किया।
जब होटल के कमरे में जाकर देखा गया तो दीक्षा नग्न अवस्था में मृत पाई गई। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।
जांच और कोर्ट में क्या हुआ?
मामले की गहन जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत में 17 गवाह पेश किए। जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) सुशील कुमार शर्मा की ओर से मजबूत पैरवी की गई।
घटनास्थल से बरामद डीवीआर को केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला, केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला चंडीगढ़ भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट को अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किया गया।
अदालत में यह भी साबित किया गया कि अभियुक्त ने दीक्षा से अपना असली नाम और धर्म छिपाया था। हत्या के बाद वह मृतका के जेवरात और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने साथ ले गया था।
बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए गए, जिनमें एक काजी भी शामिल था, जिसने कथित निकाहनामा को प्रमाणित करने की कोशिश की। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने उसे फर्जी साबित कर दिया।
अदालत का फैसला
सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी ने अभियुक्त ऋषभ तिवारी उर्फ ‘इमरान’ को दोषी ठहराया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
अब इस बहुचर्चित मामले में सजा का ऐलान 26 फरवरी को किया जाएगा।














Leave a Reply