देहरादून।
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू), देहरादून के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल द्वारा प्रतिस्पर्धी वैश्विक अनुसंधान अनुदान प्राप्त करने हेतु शोध प्रस्ताव लेखन विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार की संस्कृति को सुदृढ़ करना, गुणवत्ता आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करना तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देना रहा।
शनिवार को विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ कुलपति डॉ. प्रतापन के. पिल्लई, कुलसचिव डॉ. लोकेश गम्भीर एवं आयोजन सचिव डॉ. अशोक भण्डारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर कुलपति डॉ. पिल्लई ने कहा कि “उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार ही अकादमिक उत्कृष्टता की मजबूत नींव होते हैं। एसजीआरआर विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अंतर्विषयक शोध और वैश्विक मानकों के अनुरूप अनुसंधान को लगातार बढ़ावा दे रहा है।”
जापान और भारत के विशेषज्ञों ने साझा किया अंतरराष्ट्रीय अनुभव
कार्यशाला में जापान के हिरोशिमा विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वी. जी. पराले तथा भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग के पूर्व सलाहकार एवं प्रमुख डॉ. एस. के. वार्ष्णेय ने मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की।
डॉ. पराले ने अपने व्याख्यान में जटिल वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए अंतर्विषयक अनुसंधान, अंतर-सांस्कृतिक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उच्च प्रभाव वाली अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन और वैश्विक शोध प्राथमिकताओं के अनुरूप अनुसंधान को दिशा देने के व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए।
वहीं डॉ. एस. के. वार्ष्णेय ने सफल शोध प्रस्ताव लेखन की प्रक्रिया, प्रस्तावों की अस्वीकृति के सामान्य कारणों तथा अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय वित्तपोषण एजेंसियों की अपेक्षाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शोध प्रस्तावों में स्पष्टता, मौलिकता, व्यवहार्यता और उद्देश्यपरक दृष्टिकोण को अत्यंत आवश्यक बताया।
योन्सेई विश्वविद्यालय के साथ एमओयू बना कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण दक्षिण कोरिया के प्रतिष्ठित योन्सेई विश्वविद्यालय (QS रैंकिंग–50) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर समारोह रहा। इस एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, संकाय एवं छात्र विनिमय कार्यक्रम, सहयोगात्मक शोध प्रकाशन और नवाचार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों से जुड़े शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन न केवल प्रतिभागियों की शोध क्षमता को सशक्त करने में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि एसजीआरआर विश्वविद्यालय द्वारा उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक अनुसंधान उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भी सामने आया।













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