देहरादून।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को वर्षभर संचालित रखने के राज्य सरकार के लक्ष्य की दिशा में शीतकालीन तीर्थाटन एक मजबूत कदम बनकर उभर रहा है। केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा शीतकालीन चारधाम यात्रा को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिसका असर अब साफ दिखाई देने लगा है। कपाट बंद होने के बाद भी बदरीनाथ और केदारनाथ धाम से जुड़े शीतकालीन पूजा स्थलों में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक कुल 10,632 श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों में दर्शन कर चुके हैं।
ज्योतिरमठ और उखीमठ में विशेष अभियान
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि समिति की ओर से ज्योतिरमठ और उखीमठ में शीतकालीन तीर्थ यात्रा को बढ़ावा देने के लिए विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विद्यालयों की सहभागिता से जागरूकता रैलियों का आयोजन किया जा रहा है। इन रैलियों के माध्यम से लोगों को शीतकालीन तीर्थाटन के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व की जानकारी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शीतकालीन पर्यटन पर फोकस
बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार शीतकालीन पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य न केवल धार्मिक पर्यटन को सशक्त करना है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित करना है।
शीतकालीन पूजा स्थलों में श्रद्धालुओं की संख्या
आंकड़ों के अनुसार—
- योग बदरी, पांडुकेश्वर में 321 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए
- नृसिंह मंदिर, ज्योतिरमठ (पांडुकेश्वर) में 2,582 श्रद्धालु पहुंचे
- ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ (केदारनाथ एवं द्वितीय केदार मद्महेश्वर का शीतकालीन पूजा स्थल) में सर्वाधिक 7,729 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए
इन सभी स्थलों पर नियमित पूजा-अर्चना जारी है और श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा व व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
हिमालय की गोद में आध्यात्मिक शांति का अनुभव
बीकेटीसी के अनुसार, हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच बसे शीतकालीन पूजा स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच भगवान के दर्शन का यह अनुभव पर्यटकों के लिए भी एक अनूठा आकर्षण बनता जा रहा है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा संबल
शीतकालीन चारधाम यात्रा से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। होटल व्यवसाय, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, गाइड और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को प्रत्यक्ष लाभ हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह क्रम जारी रहा तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड शीतकालीन तीर्थाटन का राष्ट्रीय केंद्र बन सकता है।













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