बिना उपचारित गंदा पानी गंगा में बहाने वालों पर सख्त कार्रवाई, 3 दिन में सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने के निर्देश
देहरादून/ऋषिकेश, ऋषिकेश स्थित चन्द्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदे पानी एवं ठोस कचरे के गंगा नदी में प्रवाहित होने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी श्री सविन बंसल ने बुधवार को चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गंगा की स्वच्छता एवं पवित्रता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने की बात स्पष्ट शब्दों में कही।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन का सख्त एक्शन
जिलाधिकारी ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी स्थिति में दूषित जल गंगा नदी में प्रवाहित न हो। उन्होंने कहा कि गंगा में मिलने वाले सभी नालों का जल पूर्ण रूप से उपचारित होना अनिवार्य है।
25 घरों के पाइप-ड्रेन्स तत्काल सीज
निरीक्षण के दौरान नाले में गंदा पानी प्रवाहित करते पाए गए 25 आवासीय भवनों के पाइप-ड्रेन्स को तत्काल सीज करने के निर्देश नगर आयुक्त एवं जल संस्थान को दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि चाहे प्रतिष्ठान हो या आवासीय भवन, यदि गंदा पानी गंगा में डाला गया तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
गली-मोहल्लों में पैदल निरीक्षण, 3 दिन की डेडलाइन
जिलाधिकारी ने वार्ड-3 के गली-मोहल्लों में पैदल चलकर निरीक्षण किया और नालियों व सीवरेज कनेक्शन की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन नालियों का कनेक्शन सीवरेज नेटवर्क से नहीं जुड़ा है, उन्हें तीन दिवस के भीतर सीवर लाइन से जोड़ा जाए।
एसटीपी क्षमता बढ़ाने के निर्देश
जिलाधिकारी ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता वृद्धि के लिए शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिना उपचारित गंदे पानी की रोकथाम प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी विभाग समन्वय से कार्य करें।
विस्तृत रिपोर्ट और कार्ययोजना होगी सार्वजनिक
नगर निगम, पेयजल निगम, जल संस्थान, सिंचाई विभाग, सीवरेज अनुरक्षण इकाई एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपसी समन्वय से विस्तृत रिपोर्ट और कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे आम जनता के साथ भी साझा किया जाएगा।
ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का बहुमंजिला एसटीपी
सीवरेज अनुरक्षण इकाई के अधिकारियों ने बताया कि ऋषिकेश में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत 7.50 एमएलडी क्षमता का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट ढालवाला-मुनिकीरेती योजना के तहत निर्मित किया गया है। सीमित भूमि उपलब्धता के कारण यह एसटीपी बहुमंजिला स्वरूप में बनाया गया है, जो देश का अपनी तरह का पहला एसटीपी है और अक्टूबर 2020 से संचालित है।
ढालवाला नाले में ड्रोन व परिवार सर्वे
ढालवाला नाले के दोनों ओर ड्रोन सर्वे और परिवारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। प्रारंभिक सर्वे में 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 38 परिवारों का सीवर सीधे नाले में और 84 परिवारों का ग्रे-वाटर नाले में प्रवाहित पाया गया है। सभी नमूनों की जांच एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त रामकुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग सहित सीवरेज अनुरक्षण इकाई, जल निगम, जल संस्थान एवं सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।













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