कैसे चलता है डीज़ल चोरी का पूरा रैकेट?
सूत्रों के अनुसार हरिद्वार क्षेत्र में डीज़ल चोरी कोई नई बात नहीं, बल्कि वर्षों से संगठित तरीके से चल रहा यह नेटवर्क अब खुले तौर पर सामने आ गया है।
इस रैकेट में शामिल होते हैं:
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चालक और परिचालक की मिलीभगत
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फर्जी एंट्री और गलत खपत दिखाना
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तय रूट पर बस रोककर ड्रम/गैलन में डीज़ल निकालना
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चोरी किए गए डीज़ल की सप्लाई निजी वाहनों, ट्रकों, मैक्सियों और स्थानीय गैराजों तक पहुंचाना
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे देर रात बसों के आसपास ऐसी संदिग्ध गतिविधियां कई बार देख चुके हैं, लेकिन शिकायतों का कोई असर नहीं हुआ।
सरकार को करोड़ों का नुकसान, यात्रियों की सुरक्षा पर भी खतरा
डीज़ल चोरी से न सिर्फ परिवहन निगम को भारी आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि यह यात्रियों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा है।
जो बसें आधी टंकी में चलती हैं, वे रास्ते में खराब होने या अचानक रुक जाने की स्थिति में यात्रियों को जोखिम में डाल देती हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर चोरी बिना अंदरूनी सहयोग के संभव ही नहीं है। वीडियो एक बार फिर इस व्यवस्था की अंदरूनी खामियों को उजागर करता है।
क्या होगी अब कार्रवाई?
वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश है और मांग उठ रही है कि इस रैकेट में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब सभी की निगाहें उत्तराखंड परिवहन निगम और जिला प्रशासन पर हैं—क्या इस बार कार्रवाई होगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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