कमल जगाती, नैनीताल
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रुद्रप्रयाग जिले के कुंड क्षेत्र में निर्माणाधीन बाईपास को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। केदारनाथ चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित सैमी धसारी गांव की तलहटी में हो रहे इस निर्माण कार्य से लगातार पत्थरों की बरसात और निर्माण मलुवा मंदाकिनी नदी में गिरने के मामले को गंभीर मानते हुए न्यायालय की खंडपीठ ने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग सहित संबंधित कार्यदायी संस्था को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में बताया गया कि कुंड क्षेत्र में बाईपास निर्माण के कारण सैमी धसारी गांव और केदारनाथ हाईवे पर लगातार पत्थर गिर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की जान को खतरा बना हुआ है। इसके साथ ही निर्माण कार्य से निकलने वाला मलुवा सीधे मंदाकिनी नदी में समा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
बिना सुरक्षा इंतजाम के हो रहा निर्माण कार्य
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने न्यायालय को अवगत कराया कि निर्माण कार्य के दौरान कार्यदायी संस्था की ओर से न तो किसी प्रकार के सुरक्षा उपाय किए गए हैं और न ही मलुवा निस्तारण के लिए कोई अधिकृत डंपिंग जोन बनाया गया है। पत्थरों की लगातार बरसात से केदारनाथ हाईवे पर यातायात करने वाले लोगों और आसपास के गांवों के निवासियों के लिए खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
जनहित याचिका में उच्च न्यायालय से मांग की गई है कि कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीणों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। साथ ही पर्यावरण नियमों का पालन करते हुए मलुवा निस्तारण की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
हाईकोर्ट का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग और संबंधित कार्यदायी संस्था को एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई में कोर्ट जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।













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