उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सूखाताल झील के सौंदर्यीकरण से जुड़े स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर आज हुई सुनवाई में जिलास्तरीय विकास प्राधिकरण (DDA) की प्रगति रिपोर्ट दाखिल की गई, लेकिन खंडपीठ रिपोर्ट से असंतुष्ट नजर आई। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को 3 दिसंबर को उपस्थित होकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
🔹 कोर्ट ने उठाए बड़े सवाल
न्यायालय ने प्राधिकरण से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा—
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जुलाई 2024 में जब सौंदर्यीकरण कार्य पर लगी रोक हटाई गई, तब से अब तक क्या कार्य पूरे हुए?
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झील के किनारों पर अतिक्रमण को लेकर क्या निर्णय लिया गया?
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क्या सौंदर्यीकरण कार्य वास्तविक रूप से शुरू भी हुआ है?
🔹 Wetland घोषित करने पर आपत्ति
सुनवाई के दौरान प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि वे सूखाताल को वेटलैंड घोषित करने की प्रक्रिया में हैं।
इस पर न्यायमित्र अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि वेटलैंड नियमों का अनुपालन अब तक नहीं हो रहा है।
🔹 अदालत में क्या कहा गया?
अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने अदालत को बताया कि—
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जुलाई 2024 में कोर्ट ने रोक हटाते समय DDA को तीन महीने में सभी सौंदर्यीकरण कार्य पूरे करने का निर्देश दिया था।
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7 नवंबर को कोर्ट ने एक सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था, लेकिन यह अब तक दाखिल नहीं की गई।
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आज पेश की गई प्रगति रिपोर्ट वास्तविक कार्य को दर्शाने में असफल रही है, क्योंकि झील में अब तक कोई ठोस सौंदर्यीकरण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
इसी आधार पर न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को 3 दिसंबर को कोर्ट में उपस्थित रहकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।












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