खाते में आया संदिग्ध पैसा तो पड़ सकता है भारी! RBI का नया ड्राफ्ट, ट्रांजैक्शन पर लगेगी रोक

RBI Draft Rules: साइबर फ्रॉड और मनी-म्यूल अकाउंट के जरिए होने वाले वित्तीय अपराधों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक नई प्रक्रिया का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि किसी बैंक खाते में साइबर फ्रॉड से जुड़ा संदिग्ध लेन-देन पाया जाता है, तो संबंधित रकम या जरूरत पड़ने पर पूरे खाते से डेबिट यानी पैसे निकालने और ट्रांसफर करने पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी ये अंतिम नियम नहीं हैं। RBI ने प्रस्तावित निर्देशों पर लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। सुझाव देने की अंतिम तारीख 2 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। प्रस्तावित निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने हैं।

किन खातों पर लग सकती है अस्थायी रोक?

प्रस्तावित प्रक्रिया के मुताबिक, बैंकों के ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम में यदि कोई लेन-देन साइबर फ्रॉड या मनी-म्यूल गतिविधि से जुड़ा संदिग्ध पाया जाता है, तो उस रकम को अस्थायी रूप से रोकने की व्यवस्था हो सकती है।

बताया गया है कि 1,000 रुपये या उससे अधिक के लेन-देन को इस प्रक्रिया के तहत तभी संदिग्ध माना जाएगा, जब बैंक के सिस्टम में उस लेन-देन से संबंधित कोई फ्रॉड फ्लैग मौजूद हो।

यदि किसी पूरे बैंक खाते के मनी-म्यूल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने का संदेह हो, तो खाते से पैसे निकालने या दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर करने यानी डेबिट लेन-देन पर भी अस्थायी रोक लगाई जा सकती है।

क्या होता है मनी-म्यूल अकाउंट?

मनी-म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड या अन्य गैरकानूनी तरीके से हासिल रकम को प्राप्त करने और फिर उसे दूसरे बैंक खातों में भेजने के लिए किया जाता है।

कई मामलों में लोग जानबूझकर अपना बैंक खाता इस तरह की गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराते हैं। वहीं कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के किसी अन्य व्यक्ति को अपने खाते का इस्तेमाल करने की अनुमति दे देते हैं। ऐसे खाते साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाली रकम को आगे ट्रांसफर करने का माध्यम बन सकते हैं।

खाता होल्ड होने पर ग्राहक को क्या जानकारी मिलेगी?

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि बैंक किसी खाते पर अस्थायी डेबिट रोक लगाता है, तो ग्राहक को इसकी सूचना दी जानी होगी। नोटिस में रोक लगाए जाने की वजह, उसे हटाने की प्रक्रिया और संबंधित लेन-देन की जानकारी दी जा सकती है।

ग्राहक को अपना पक्ष रखने के लिए 20 दिन तक का समय मिल सकता है। वहीं, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अस्थायी डेबिट रोक की अवधि सामान्य तौर पर 60 दिन तक हो सकती है।

1 अप्रैल 2027 से लागू होने का प्रस्ताव

RBI की यह व्यवस्था फिलहाल ड्राफ्ट चरण में है। RBI ने प्रस्तावित निर्देशों पर सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। इसके लिए अंतिम तारीख 2 अक्टूबर 2026 है। सुझावों पर विचार के बाद अंतिम निर्देश जारी किए जाएंगे और प्रस्तावित व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की बात कही गई है।

इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम को संदिग्ध खातों से आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर होने से रोकना और बैंकों के बीच ऐसी गतिविधियों से निपटने के लिए एक समान प्रक्रिया तैयार करना है।

 

 

 

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