नैनीताल में गुलदार तस्करी का भंडाफोड़, दो खाल और हड्डियों के साथ आरोपी गिरफ्तार

नैनीताल (कमल जगाती)।
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में वन विभाग और एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। किलबरी–पंगूट मोटर मार्ग पर छापेमारी के दौरान दो गुलदारों की खाल और भारी मात्रा में लगभग छह माह पुरानी गुलदार की हड्डियों के साथ एक कुख्यात वन्यजीव तस्कर को गिरफ्तार किया गया है।

वन विभाग और STF की संयुक्त कार्रवाई

प्रभागीय वनाधिकारी नैनीताल आकाश गंगवार एवं एसडीओ ममता चंद के निर्देशों पर यह कार्रवाई की गई। नगरपालिका फॉरेस्ट रेंज और प्राणी उद्यान के रेंज अधिकारियों ललित मोहन कार्की एवं आनंद लाल आर्या, तथा यूके एसटीएफ टीम ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन को अंजाम दिया।

कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी, जिसमें तस्कर की गतिविधियों की पहले से निगरानी की जा रही थी। सही समय पर दबिश देकर तस्कर को रंगे हाथों पकड़ा गया।

तस्कर की पहचान और पूछताछ जारी

गिरफ्तार तस्कर की पहचान महेश सिंह कपकोटी, निवासी कपकोट, जनपद बागेश्वर के रूप में हुई है। वन विभाग को आशंका है कि महेश सिंह लंबे समय से वन्यजीव अंगों की तस्करी में संलिप्त था।

गिरफ्तारी के बाद वन विभाग और एसटीएफ की टीमें उससे गहन पूछताछ कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि—

  • गुलदारों का शिकार कब और कहां किया गया
  • किस जंगल क्षेत्र में पोचिंग हुई
  • इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं
  • खाल और हड्डियों की आगे सप्लाई कहां की जानी थी

गुलदार संरक्षित वन्यजीव, शिकार गंभीर अपराध

गुलदार (Leopard) को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की प्रथम अनुसूची (Schedule-I) में शामिल किया गया है। ऐसे में इसका शिकार, अंगों का व्यापार या तस्करी गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।

वन्यजीव अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज

वन विभाग द्वारा गिरफ्तार तस्कर के खिलाफ नैनीताल नगरपालिका फॉरेस्ट रेंज में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

वन विभाग को मिली बड़ी सफलता

वन विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बड़ी सफलता है। विस्तृत पूछताछ के बाद पूरे तस्करी नेटवर्क से जुड़े अहम खुलासे होने की उम्मीद है।

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