नैनीताल उच्च न्यायालय ने नाराजगी जताई है कि सरकारी विभागों में स्वीकृत पद रिक्त होने के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वीकृत और रिक्त पदों पर ठेके या आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्तियां करना, न केवल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। कोर्ट ने इसे राज्य की बड़ी निष्क्रियता माना है।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने बीते दिनों एक मामले की सुनवाई के दौरान याचिका का दायरा बढ़ा दिया है। इस संबंध में पीठ ने कहा कि जहां एक ओर सरकारी नौकरियों के इंतजार में युवा ‘ओवरएज’ हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार नियमित पदों को भरने के बजाय लगातार ठेका-आउटसोर्स अस्थायी माध्यमों से काम चलाने में लगी है।
पीठ ने इस प्रथा को ‘शोषणकारी’ और ‘तर्कहीन’ करार दिया। पीठ ने चतुर्थ श्रेणी पदों को डाइंग कैडर (समाप्त होने वाला संवर्ग) घोषित करने पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जिस नीति को आधार बनाकर इन पदों को खत्म किया जा रहा है, उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही असंवैधानिक घोषित कर चुका है। ऐसे में इन पदों को समाप्त करना रोजगार के अवसरों को बंद करने जैसा है।
16 फरवरी को होगी मामले की अगली सुनवाई
मुद्दे की गहराई तक जाएगी अदालत
अब मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट में 16 फरवरी 2026 को होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है, कि वह इस मुद्दे की गहराई तक जाएगी, ताकि योग्य और पात्र युवाओं को उनका संवैधानिक हक मिल सके और प्रदेश में नियमित नियुक्तियों का रास्ता साफ हो।
मुख्य सचिव को सख्त निर्देश’
इस मामले में कोर्ट ने मुख्य सचिव को सख्त निर्देश दिए हैं, कि वे सभी विभागों के सचिवों से रिक्त पदों का पूरा डेटा एकत्र करके एक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करें। सरकार को यह बताना होगा कि जब पद स्वीकृत हैं, तो उन पर नियमित भर्ती क्यों नहीं की जा रही है जबकि सरकारी विभागों में खाली पदों को आउटसोर्स या दैनिक वेतन भोगियों के माध्यम से भरा जा रहा है।
40 हजार अस्थायी कर्मी, ठेका, आउटसोर्स, संविदा के भरोसे विभाग
उत्तराखंड में कई सरकारी विभाग ठेका, आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं। जबकि पद रिक्त हैं, हालांकि, राज्य में अभी स्थायी पदों पर आउटसोर्स भर्तियों पर रोक है।
उत्तराखंड में 22 हजार उपनल कर्मचारियों समेत पीआरडी, ठेका, स्वयं सहायता समूह के जरिए 40 हजार से अधिक अस्थायी कर्मचारी विभिन्न विभागों और निगमों में सेवाएं अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कई विभागों में इन कर्मचारियों को पूरे वेतनमान, महंगाई भत्ते समेत अन्य सुविधाएं भी मिल रही हैं।
सातवें वेतनमान में चतुर्थ श्रेणी संवर्ग मृत घोषित हुआ
चतुर्थ श्रेणी के पदों को सातवें वेतनमान में मृत घोषित कर दिया गया। सरकारी विभागों में चतुर्थ श्रेणी श्रेणी के पदों पर भर्ती नहीं हो रही है। कर्मचारी संगठन लगातार चतुर्थ श्रेणी पदों को पुनर्जीवित करने की मांग कर रहे हैं।
नियमित किए जाने के साथ ही समान काम का समान वेतन देने के भी आदेश दिए गए हैं। इसके बाद नियमितीकरण और समान वेतन देने के लिए सरकार ने कैबिनेट की सब कमेटी का गठन किया है।













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