देश के लिए बलिदान हुए सैनिकों के परिवार वालों को मिलेंगे 50 लाख

देहरादून : उत्तराखंड एक सैनिक बाहुल्य राज है यहां हर चौथे घर से आपको कोई न कोई सदस्य परिवार में सैनिक जरूर मिलेगा। यहां के युवाओं की  अपने भविष्य को लेकर पहली पसंद ही सेना में भर्ती  होकर देश की सेवा करना होता है। देश के सेवा के लिए सैनिक अपने जीवन का बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटते। औसतन बात करें तो लगभग हर नहीं उत्तराखंड के एक सैनिक ने देश के लिए अपना जीवन का बल्दीदान दिया है। जानकारी अनुसार राज्य गठन के बाद पिछले 24 सालों में लगभग 403 सैनिक देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे चुके है।

राज्य सरकार वर्तमान सेना में देश के लिए में बलिदान देने वाले सैनिकों के परिवार या मृतक आश्रितों को 10 लाख का अनुदान देती हैं। बीती कारगिल विजय दिवस के दिन प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी की अब सैनिक के मृतक आश्रितों को अनुदान बढ़ा दिया जायेगा और 10 लाख से 50 लाख हो जाएगा जिसके बाद यह मामला न्याय विभाग में विचाराधीन था। 3 महीने बाद न्याय विभाग से मंजूरी मिल गई जिसके बाद अब प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जा रहा है।

आपको बता दें :

उत्तराखंड के अब तक 1679 सैनिक देश के लिए बलिदान दे चुके हैं। 1962 के भारत-चीन युद्ध में उत्तराखंड के 245 सैनिकों ने अपना बलिदान दिया। 1962 में यह युद्ध 20 अक्तूबर से 20 नवंबर तक चला। जबकि 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में उत्तराखंड के 217 सैनिकों ने अपना बलिदान दिया।

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