स्टोरी: कमल जगाती, नैनीताल
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित विश्वविख्यात कैंची धाम आश्रम को लेकर सोशल मीडिया और कुछ न्यूज़ पोर्टलों पर प्रसारित की जा रही कथित भ्रामक खबरों के बीच ट्रस्ट ने आधिकारिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है। ट्रस्ट के अधिवक्ता राजीव बिष्ट मीडिया के सामने आए और उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए तथ्य सार्वजनिक किए।
1974 में हुआ था ट्रस्ट का गठन, नियमित होता है सरकारी ऑडिट
अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने बताया कि कैंची धाम को वर्ष 1974 में चैरिटेबल एंडोमेंट एक्ट 1890 के तहत तत्कालीन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा ट्रस्ट के नाम दर्ज किया गया था। 6 मार्च 1974 को इसकी संपत्ति का गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ था।
उन्होंने बताया कि नियमानुसार ट्रस्ट में समय-समय पर सदस्य बदलते रहे हैं और अब तक कुल 13 सदस्य ट्रस्ट में शामिल हो चुके हैं। ट्रस्ट का हर वर्ष सरकारी ऑडिट कराया जाता है और 31 मार्च 2024 तक का ऑडिट पूरा हो चुका है।
इसके साथ ही मंदिर का आयकर रिटर्न भी नियमित रूप से दाखिल किया जाता है।
चढ़ावे की गिनती SBI टीम की मौजूदगी में
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती State Bank of India (एसबीआई) की टीम की मौजूदगी में ट्रस्ट के सदस्यों के साथ मिलकर की जाती है और पूरी प्रक्रिया के बाद राशि बैंक में जमा कराई जाती है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय अनियमितता के जो आरोप लगाए गए हैं, वे बिना तथ्यों की जांच के लगाए गए हैं।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर 18 मार्च को सुनवाई
मामले की पृष्ठभूमि में पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला द्वारा कैंची धाम में वित्तीय अनियमितता और आसपास अतिक्रमण के आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा गया था।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित है।
इसी बीच कुछ न्यूज़ पोर्टलों, यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कैंची धाम को लेकर नकारात्मक और भ्रामक खबरें प्रसारित की जा रही थीं। ट्रस्ट के अधिवक्ता ने मीडिया से अपील की है कि बिना प्रमाणित तथ्यों के खबरें प्रकाशित न की जाएं और न्यायालय में लंबित मामले पर ऐसी कोई रिपोर्टिंग न हो जिससे अदालत की अवमानना की स्थिति उत्पन्न हो।
ट्रस्ट की अपील: तथ्यों के आधार पर ही हो रिपोर्टिंग
अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने कहा कि कैंची धाम की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सभी मीडिया संस्थानों, पोर्टलों और सोशल मीडिया संचालकों से अनुरोध किया कि सत्यापित जानकारी के आधार पर ही खबरें प्रकाशित की जाएं।
कैंची धाम देश-विदेश में आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वह न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखेगा और सभी प्रक्रियाएं कानून के अनुरूप संचालित हो रही हैं।












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