काशीपुर। उत्तराखंड में अब नागरिक ई-मेल के माध्यम से भी एफआईआर दर्ज करा सकेंगे। यह महत्वपूर्ण जानकारी उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा सूचना अधिकार के तहत उपलब्ध कराई गई है। राज्य के अधिकांश थानों के थाना प्रभारी/प्रभारी निरीक्षकों की आधिकारिक ई-मेल आईडी पुलिस विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से संज्ञेय अपराधों की रिपोर्ट भेजी जा सकती है।
यह सूचना काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) को लोक सूचना अधिकारी द्वारा प्रदान की गई।
वेबसाइट पर उपलब्ध हैं थानों की ई-मेल आईडी
नदीम उद्दीन द्वारा उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय से राज्य के सभी थानों के प्रभारी अधिकारियों की ई-मेल आईडी की सूची मांगी गई थी, जिन पर ई-मेल भेजकर एफआईआर दर्ज कराई जा सके। इसके जवाब में लोक सूचना अधिकारी/पुलिस अधीक्षक (प्रो0/मॉर्डन) ममता वोहरा ने पत्रांक 580 के साथ एससीआरबी की ओर से जारी पत्र की प्रति उपलब्ध कराई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सभी संबंधित थानों की ई-मेल आईडी उत्तराखंड पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट
uttarakhandpolice.uk.gov.in पर उपलब्ध है।
वेबसाइट के होमपेज पर “Know Your Police Station” विकल्प पर क्लिक कर जिला और थाना चयन करने पर संबंधित थाने का क्षेत्र, थाना प्रभारी का नाम, मोबाइल नंबर, फोन नंबर और ई-मेल आईडी देखी जा सकती है। हालांकि, कुछ थानों की ई-मेल आईडी अभी उपलब्ध नहीं हैं, जिन्हें अपडेट करने के लिए अनुरोध किया गया है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रावधान
नदीम उद्दीन ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस थाने को दी जा सकती है। इसके अनुरूप राज्य सरकार ने उत्तराखंड भारतीय नागरिक सुरक्षा नियमावली 2024 में विस्तृत प्रावधान किए हैं।
क्या है नियम 9(4) का प्रावधान?
नियम 9(4) के अनुसार:
- ई-मेल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राप्त शिकायत को डाउनलोड कर थाने के कंप्यूटर में सुरक्षित रखा जाएगा।
- उसे ई-शिकायत रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
- थाना प्रभारी तीन दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को थाने में उपस्थित होकर हस्ताक्षर करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचित करेगा।
- यदि शिकायतकर्ता तीन दिन बाद उपस्थित होता है, तो उसे नई सूचना मानकर कार्यवाही की जाएगी।
साथ ही, यदि ई-मेल के माध्यम से प्राप्त सूचना किसी गंभीर अपराध की ओर संकेत करती है, तो थाना प्रभारी स्वयं या उपनिरीक्षक अथवा उससे वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल घटनास्थल पर भेजकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
पारदर्शिता और भ्रष्टाचार में आएगी कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से एफआईआर दर्ज कराने में होने वाली देरी, उत्पीड़न, सिफारिश और भ्रष्टाचार जैसी शिकायतों में कमी आएगी। डिजिटल माध्यम से शिकायत दर्ज करने की सुविधा नागरिकों को अधिक सशक्त और सुरक्षित बनाएगी।
उत्तराखंड पुलिस द्वारा ई-मेल के माध्यम से एफआईआर दर्ज करने की सुविधा नागरिकों के लिए एक बड़ा कदम है। यह व्यवस्था न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी बल्कि कानून व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह भी बनाएगी।













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