देहरादून।
उत्तराखंड में बंदरों की बढ़ती समस्या के बीच जनप्रतिनिधियों द्वारा उन्हें भोजन कराए जाने को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के बाद अब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता तीरथ सिंह रावत भी सार्वजनिक रूप से बंदरों को दाना डालते नजर आए। इन घटनाओं के बाद आम लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इस तरह की गतिविधियां बंदर समस्या को और बढ़ावा नहीं देतीं।
वन्यजीव मामलों से जुड़े जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर वन्यजीवों को भोजन कराना Wildlife Protection Act की भावना के अनुरूप नहीं है। इससे जानवरों की प्राकृतिक आदतों में बदलाव आता है और उनकी संख्या असंतुलित रूप से बढ़ सकती है।
किसानों और ग्रामीणों की बढ़ती चिंता
प्रदेश के कई पहाड़ी जिलों में बंदरों के कारण किसान लगातार नुकसान झेल रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बंदर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि कई क्षेत्रों में उनके घरों में घुसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों की समस्या को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान जमीन पर दिखाई नहीं देता।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर चर्चा
सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं बंदरों को भोजन कराते नजर आते हैं, तो इससे आम जनता में यह संदेश जाता है कि ऐसा करना सही है। जानकारों के अनुसार इससे लोग भी सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों को भोजन कराने लगते हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य दोनों ही राज्य के जिम्मेदार पदों पर रह चुके हैं रेखा आर्य अभी भी कैबिनेट मंत्री हैं, ऐसे में उनसे यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इस विषय में जनजागरूकता और समाधान की दिशा में पहल करें।
क्या हो सकता है समाधान
वन विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बंदर समस्या से निपटने के लिए सरकार को ठोस और दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की जरूरत है। इसके तहत:
- बंदरों के लिए निर्धारित क्षेत्र या हैबिटेट विकसित करना
- बड़े स्तर पर स्टेरलाइजेशन अभियान चलाना
- सार्वजनिक स्थानों पर फीडिंग को लेकर सख्ती और जागरूकता
- किसानों को फसल सुरक्षा के लिए तकनीकी और आर्थिक सहयोग
स्थायी समाधान की मांग
प्रदेशवासियों का कहना है कि बंदर समस्या अब केवल वन्यजीव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों की आजीविका और ग्रामीण जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। लोगों को उम्मीद है कि सरकार और जनप्रतिनिधि इस दिशा में जल्द प्रभावी कदम उठाएंगे।













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