देहरादून | उत्तराखंड में चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। पूर्व कृषि अधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर जोशी की पहल पर राज्य के चिकित्सकों द्वारा मेडिकल काउंसिल नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है।
यह कार्रवाई सीएमएचएल पोर्टल पर दर्ज शिकायत संख्या CMHL-112025-11-891129 (दिनांक 14 नवंबर 2025) के निस्तारण के दौरान की गई, जिसमें राज्यभर में चिकित्सकों द्वारा नियमों का पालन न किए जाने की बात सामने आई।
क्या थी शिकायत?
भीमताल निवासी चंद्रशेखर जोशी द्वारा दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उत्तराखंड के कई चिकित्सक—
- अपने क्लीनिकों में
- प्रिस्क्रिप्शन पर्चियों पर
- प्रमाण-पत्र एवं रसीदों पर
अपनी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक डिग्रियाँ और राज्य मेडिकल काउंसिल द्वारा जारी पंजीकरण संख्या को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं कर रहे हैं।
इससे आम मरीज भ्रमित होते हैं और चिकित्सा व्यवस्था की साख पर नकारात्मक असर पड़ता है।
विभागीय जांच में क्या सामने आया?
स्वास्थ्य महानिदेशालय, देहरादून द्वारा किए गए परीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि कई चिकित्सालयों में INDIAN MEDICAL COUNCIL (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations–2002 के—
- पैरा 1.4.1
- पैरा 1.4.2
का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है।
नियम क्या कहते हैं?
इन नियमों के अनुसार—
✔ प्रत्येक चिकित्सक को अपनी राज्य मेडिकल काउंसिल पंजीकरण संख्या क्लीनिक, प्रिस्क्रिप्शन, प्रमाण-पत्र और रसीदों पर स्पष्ट रूप से अंकित करनी होगी।
✔ चिकित्सक अपने नाम के साथ केवल वही डिग्री, डिप्लोमा या सदस्यता लिख सकते हैं जो मान्यता प्राप्त हों और वास्तविक व्यावसायिक योग्यता को दर्शाती हों।
स्वास्थ्य विभाग की सख्त चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग ने पत्र संख्या 24/राजयो/13/2025 के माध्यम से राज्य के सभी जिला स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि—
➡ सभी चिकित्सकों को तत्काल नियमों के अनुपालन के लिए चेतावनी दी जाए।
➡ भविष्य में किसी भी तरह के उल्लंघन पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।
➡ चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता और जन-विश्वास को प्राथमिकता दी जाए।
चंद्रशेखर जोशी की पहल बनी मिसाल
शिकायतकर्ता चंद्रशेखर जोशी का कहना है—
“जब चिकित्सक अपनी मान्यता प्राप्त डिग्रियाँ और पंजीकरण संख्या प्रदर्शित नहीं करते, तो मरीज भ्रमित होता है। चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियमों का पालन बेहद जरूरी है।”
जोशी की इस पहल के बाद न केवल शिकायत का निस्तारण हुआ, बल्कि पूरे राज्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।
जन शिकायतों से मजबूत हो रही व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार—
➡ ऑनलाइन शिकायत प्रणाली से पारदर्शिता में बढ़ोतरी हुई है।
➡ आमजन की शिकायतों के आधार पर त्वरित सुधार संभव हो पा रहे हैं।
➡ यह मामला इस बात का प्रमाण है कि जन सहभागिता से स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।













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