देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर के सभी शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। यह निर्णय हाल ही में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा जारी आदेश सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेज दिया गया है।
नई एसओपी का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में बढ़ती अव्यवस्था, दबाव, अभद्र व्यवहार और हिंसक घटनाओं पर रोक लगाना तथा सुरक्षित और नियंत्रित कार्य वातावरण स्थापित करना है।
एसओपी का दायरा
यह एसओपी राज्य के सभी शासकीय कार्यस्थलों—निदेशालयों, जिलाधिकारी परिसरों, खंड विकास कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और चिकित्सा संस्थानों—पर लागू होगी। हालांकि पहले से उच्च सुरक्षा व्यवस्था वाले सचिवालय और विधानसभा परिसर को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
विभागों को आवश्यकता के अनुसार PSARA के तहत पंजीकृत सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा कर्मी तैनात करने की अनुमति दी गई है।
प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव
1. अनिवार्य पहचान
सभी स्थायी एवं संविदा कर्मचारियों के लिए टैम्पर-प्रूफ पहचान पत्र स्पष्ट रूप से धारण करना अनिवार्य किया गया है।
2. वाहन प्रवेश पर नियंत्रण
- आम नागरिकों के वाहनों का परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
- वीआईपी और दिव्यांगजनों के वाहनों की अंडर-व्हीकल मिरर से जांच के बाद ही अनुमति दी जाएगी।
3. सख्त स्क्रीनिंग प्रक्रिया
- प्रवेश द्वारों पर DFMD स्कैनर अनिवार्य होंगे।
- सभी आगंतुकों की फ्रिस्किंग की जाएगी।
- पूर्व में दुर्व्यवहार करने वाले व्यक्तियों के लिए “नो-एंट्री फोटो पंजिका” रखी जाएगी।
विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम (VMS) अनिवार्य
जहां संभव होगा, वहां डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा, अन्यथा भौतिक रजिस्टर रखा जाएगा।
VMS के अंतर्गत:
- आगंतुक की उच्च गुणवत्ता वाली फोटो
- वैध सरकारी पहचान पत्र का सत्यापन
- नाम, पता, मोबाइल नंबर और आगमन का उद्देश्य दर्ज किया जाएगा
- सत्यापन के बाद QR/RFID आधारित टाइम-स्टैम्प पास जारी होगा
डिजिटल सुविधा उपलब्ध न होने पर हस्ताक्षरित पेपर पास जारी किया जाएगा, जिसमें प्रवेश-निकास समय और मान्य क्षेत्र दर्ज होगा।
वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात केवल पूर्व-निर्धारित अपॉइंटमेंट के आधार पर ही संभव होगी।
आगंतुकों के लिए आचार संहिता
क्या करें (Do’s)
- रिसेप्शन पर पंजीकरण
- वैध पहचान पत्र दिखाना
- निर्धारित समय या टोकन की प्रतीक्षा
- शिष्ट भाषा का प्रयोग
क्या न करें (Don’ts)
- शोर-शराबा, नारेबाजी या गाली-गलौज
- धक्का-मुक्की या हमला
- बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्डिंग
- ज्वलनशील पदार्थ, हथियार या आपत्तिजनक वस्तु लाना
लोक सेवक के साथ अभद्र व्यवहार या हमला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर का आधार होगा। दोषी को तत्काल परिसर से बाहर किया जाएगा।
बैठक और जनसुनवाई के नए प्रोटोकॉल
- विभागाध्यक्ष जन-शिकायतों के लिए निर्धारित समय तय करेंगे और उसे वेबसाइट व कार्यालय परिसर में प्रदर्शित करेंगे।
- प्रतिनिधिमंडल में अधिकतम दो लोग अधिकारी कक्ष में प्रवेश कर सकेंगे।
- अधिक संख्या होने पर बैठक कॉन्फ्रेंस रूम में होगी, जहां CCTV और अतिरिक्त निकास द्वार अनिवार्य होगा।
- निर्वाचित प्रतिनिधि अधिकतम तीन लोगों के साथ अधिकारी कक्ष में जा सकेंगे।
- वीआईपी के साथ आए सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों को अपने शस्त्र घोषित कर निर्धारित प्रतीक्षालय में रुकना होगा।
उन्नत सुरक्षा अवसंरचना
CCTV व्यवस्था
- प्रवेश द्वार, गलियारे और वरिष्ठ अधिकारियों के कक्ष में HD कैमरे (ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित) लगाए जाएंगे।
- न्यूनतम 90 दिन तक फुटेज का बैकअप स्थानीय सर्वर पर सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
साइलेंट पैनिक अलार्म
- वरिष्ठ अधिकारियों की डेस्क और रिसेप्शन पर गुप्त पैनिक अलार्म लगाए जाएंगे।
- आपात स्थिति में बिना शोर सुरक्षा बलों को संकेत भेजा जाएगा।
घटना के बाद कानूनी प्रक्रिया
- घटनास्थल को सील कर साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
- CCTV फुटेज की कॉपी जांच अधिकारी को दी जाएगी।
- घायल कर्मचारियों का तत्काल उपचार और मेडिको-लीगल केस दर्ज होगा।
- विवेचना निरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी और दो माह के भीतर पूरी करनी होगी।
वार्षिक सुरक्षा ऑडिट
उच्च जोखिम वाले कार्यालयों में गृह विभाग द्वारा वार्षिक सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस मुख्यालय को सौंपी गई है।
शासन का स्पष्ट संदेश
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि एसओपी को पूरी सख्ती से लागू किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय कार्यालयों में अब सुरक्षा, अनुशासन और कानूनसम्मत व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।













Leave a Reply