मिडिल ईस्ट में बड़ा उलटफेर: धमकियों से पीछे हटे Donald Trump, जंग पर लगी रोक

मिडिल ईस्ट में पिछले एक महीने से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच अब एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद भड़की इस जंग में फिलहाल ब्रेक लग गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ऐलान किया है कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को दो हफ्तों के लिए रोका जाएगा, जिससे कूटनीतिक बातचीत के लिए रास्ता खुल सकता है।

 पाकिस्तान की मध्यस्थता से बना माहौल

इस फैसले के पीछे एक अहम कूटनीतिक पहल सामने आई है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir के साथ बातचीत के बाद ट्रंप ने यह कदम उठाया।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए दो हफ्ते का युद्धविराम प्रस्ताव दिया था, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया।

 ईरान की 10 शर्तें, बातचीत की तैयारी

ईरान ने साफ किया है कि यह सीजफायर जंग के खत्म होने का संकेत नहीं है।

तेहरान की ओर से अमेरिका के सामने 10-सूत्रीय प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें प्रमुख मांगें शामिल हैं:

  • सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाना
  • जब्त संपत्तियों को वापस करना
  • युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा

इन मुद्दों पर चर्चा के लिए 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत प्रस्तावित है।

 होर्मुज़ स्ट्रेट पर नया प्लान

Donald Trump ने एक और बड़ा संकेत देते हुए कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट पर अमेरिका और ईरान का संयुक्त नियंत्रण संभव हो सकता है।

यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, इसलिए इसका नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

 ट्रंप का बयान: “शांति का बड़ा दिन”

सीजफायर की घोषणा के बाद ट्रंप ने इसे विश्व शांति के लिए बड़ा कदम बताया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण में मदद करेगा और होर्मुज़ स्ट्रेट में व्यापार और आवाजाही को सुचारू बनाएगा।

उनके अनुसार, अगर सब कुछ ठीक रहा तो मिडिल ईस्ट में ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत हो सकती है।

 अभी खत्म नहीं हुई जंग

हालांकि, हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसकी सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक वह युद्ध को समाप्त मानने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है।

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष फिलहाल थमता नजर आ रहा है, लेकिन यह स्थायी शांति का संकेत नहीं है।

अब सबकी निगाहें 10 अप्रैल की बातचीत पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह सीजफायर स्थायी शांति में बदलेगा या फिर संघर्ष दोबारा भड़क सकता है।

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