देहरादून/कालागढ़: उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए अब तकनीक बड़ा हथियार बनती जा रही है। कालागढ़ टाइगर रिजर्व में शुरू की गई AI आधारित चेतावनी प्रणाली ने वन विभाग को अलर्ट और एक्शन मोड में ला दिया है।
कैसे काम कर रही है AI चेतावनी प्रणाली?
वन विभाग ने इस सिस्टम के तहत जंगलों में इंफ्रारेड कैमरे लगाए हैं, जो 50 मीटर तक की गतिविधियों को कैप्चर करते हैं। इन कैमरों से ली गई तस्वीरों का विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किया जाता है।
AI सिस्टम को खासतौर पर ऐसे वन्यजीवों की पहचान के लिए ट्रेन किया गया है जो इंसानों के लिए खतरा बन सकते हैं, जैसे:
- हाथियों का झुंड
- तेंदुआ (गुलदार)
- बाघ
- भालू
जैसे ही इनका मूवमेंट रिकॉर्ड होता है, तुरंत अलर्ट वन कर्मियों तक पहुंच जाता है, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके।
एक महीने में 10 से ज्यादा अलर्ट
यह प्रणाली करीब एक महीने पहले शुरू की गई थी और अब तक 10 से अधिक अलर्ट जारी किए जा चुके हैं। हाल ही में हाथियों के झुंड और तेंदुए की गतिविधि पर अलर्ट जारी होने के बाद वन विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हुई और संभावित खतरे को टालने में सफलता मिली।
सोलर सिस्टम से चल रही पूरी व्यवस्था
इस हाईटेक सिस्टम को सौर ऊर्जा (Solar Power) से जोड़ा गया है, जिससे बिजली की निर्बाध आपूर्ति बनी रहती है।
- कैमरे दूरस्थ जंगलों में भी काम कर रहे हैं
- डेटा ट्रांसमिशन के लिए नेटवर्क कनेक्टिविटी सुनिश्चित की गई है
- पहले चरण में 9 संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं
शिकारियों पर भी कसेगा शिकंजा
वन विभाग अब इस सिस्टम को और उन्नत बनाने की तैयारी में है। भविष्य में AI को हथियारों की पहचान करने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे अवैध शिकार (Poaching) पर रोक लगाई जा सके।
क्यों खास है यह पहल?
- मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी
- समय रहते अलर्ट और रिस्पॉन्स
- टेक्नोलॉजी से जंगल सुरक्षा मजबूत
- वन कर्मियों की सुरक्षा में भी इजाफा
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में AI का यह प्रयोग जंगलों और इंसानों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा और आधुनिक कदम माना जा रहा है।












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