अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी के आरोपों से मचा हड़कंप…..
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित घोटाले ने देशभर में चर्चा छेड़ दी है। करोड़ों रुपये के चढ़ावे में हेराफेरी और गबन के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई पदाधिकारी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी गई है, लेकिन जांच की निष्पक्षता को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
मंदिर ट्रस्ट के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की जिम्मेदारी मंदिर की व्यवस्थाओं, सुरक्षा और चढ़ावे की राशि की गिनती की निगरानी से जुड़ी बताई जाती है। इनमें महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।
आलोचकों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता हुई है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालांकि, अब तक ट्रस्ट की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
SIT जांच पर भी उठ रहे हैं निष्पक्षता के सवाल
मामले की जांच कर रही एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह मानी जा रही है कि जिन लोगों की देखरेख में पूरा सिस्टम संचालित होता रहा, उन्हीं से जुड़े लोगों पर आरोप लग रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसी को निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
बरामद हुई करोड़ों की रकम, कुल राशि को लेकर अटकलें
सूत्रों के अनुसार, मामले में गिरफ्तार किए गए पांच संदिग्धों की निशानदेही पर लगभग तीन करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक चर्चाओं में कथित गबन की राशि आठ करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी।
सोशल मीडिया पर यह आंकड़ा 200 करोड़ रुपये तक पहुंचने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक आंकड़े जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
सोना-चांदी और जेवरात गायब होने की भी चर्चा
मामले से जुड़े सूत्रों का दावा है कि नकद राशि के अलावा श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों में भी अनियमितताएं सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में करोड़ों रुपये मूल्य के जेवरात गायब होने तथा दो किलो वजनी सोने की गदा के लापता होने जैसी बातें भी सामने आई हैं।
हालांकि, इन दावों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या ट्रस्ट ने पुष्टि नहीं की है।
नृपेंद्र मिश्र बोले- व्यवस्था की खामियों की भी होगी जांच
श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि जांच केवल दोषियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी व्यवस्था की कमियों और खामियों की भी पड़ताल की जाएगी। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विनय कटियार का बड़ा बयान
भाजपा के वरिष्ठ नेता और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे विनय कटियार ने कहा कि यदि किसी ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इकबाल अंसारी ने की निष्पक्ष जांच की मांग
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के दान से जुड़े किसी भी मामले में सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी सवाल
मामले में एक बड़ा सवाल चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर भी उठ रहा है। जानकारी के अनुसार, बैंक द्वारा एक आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन इन कर्मचारियों के चयन में ट्रस्ट की भूमिका होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों के ट्रस्ट पदाधिकारियों से करीबी संबंध होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है।
सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप
सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में कार्यरत कई कर्मचारियों को परिसर के भीतर स्वतंत्र आवाजाही की अनुमति थी। आरोप है कि कई मामलों में कर्मचारियों की नियमित तलाशी या कड़ी निगरानी नहीं की गई, जिससे सुरक्षा और वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
राम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पत्र याचिका भी भेजी गई है। अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी द्वारा भेजी गई याचिका में मामले की स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सीबीआई, से जांच कराने और न्यायिक निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
याचिका में मंदिर कोष के संग्रह, लेखा-जोखा और वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए स्थायी निगरानी तंत्र बनाने का भी आग्रह किया गया है।
भीड़ बढ़ने के दौरान बढ़ी गड़बड़ियों की आशंका
सूत्रों का दावा है कि महाकुंभ और माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई थी। इसी दौरान चढ़ावे की रकम में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जिसका फायदा उठाकर कथित रूप से गड़बड़ियां की गईं।
हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी.
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सच्चाई को सामने लाने और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की है। फिलहाल पूरे देश की नजर एसआईटी जांच और संभावित न्यायिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
(नोट: इस खबर में उल्लिखित कई आरोप और दावे जांच के अधीन हैं। आधिकारिक पुष्टि होने तक इन्हें आरोप और दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।)











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