हरेला 2026: 15.50 लाख पौधों के साथ देहरादून बनेगा ग्रीन सिटी, बनेगा हरित कंट्रोल रूम

देहरादून। उत्तराखंड की रजत जयंती (25वें स्थापना वर्ष) के अवसर पर इस बार हरेला पर्व (Harela 2026) को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। 16 जुलाई से शुरू होकर एक माह तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत देहरादून जिले में 15.50 लाख पौधे लगाए जाएंगे। अभियान की खास बात यह होगी कि थीमैटिक पौधरोपण के जरिए ईको-टूरिज्म (Eco Tourism) को बढ़ावा दिया जाएगा और पूरे अभियान की निगरानी के लिए पहली बार ‘हरित कंट्रोल रूम’ स्थापित किया जाएगा।

16 जुलाई से शुरू होगा एक माह का विशेष अभियान

मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में हरेला पर्व की तैयारियों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि यह अभियान केवल औपचारिक पौधरोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे धरती को हरा-भरा बनाने के लिए जनभागीदारी का बड़ा अभियान बनाया जाएगा।

ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विकसित होंगे ‘क्वालिटी फॉरेस्ट’

इस वर्ष अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी के अनुरूप विशेष प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य भविष्य में ‘क्वालिटी फॉरेस्ट’ विकसित कर उत्तराखंड में ईको-टूरिज्म को नई पहचान देना है।

अभियान में आईएमए (IMA), सर्वे ऑफ इंडिया, ओएनजीसी (ONGC) और आईटीबीपी (ITBP) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

हर विभाग में बनेगा नोडल अधिकारी, माइक्रो प्लानिंग पर रहेगा जोर

जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द पौधरोपण स्थलों का चयन करें। प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो माइक्रो लेवल पर पूरी कार्ययोजना तैयार करेगा। अभियान में जनप्रतिनिधियों, महिला समूहों, युवाओं और स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

‘हरित कंट्रोल रूम’ करेगा पूरे अभियान की मॉनिटरिंग

पौधरोपण अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए इस बार एक विशेष ‘हरित कंट्रोल रूम’ बनाया जाएगा। यह कंट्रोल रूम पूरे एक माह तक अभियान की प्रगति पर नजर रखेगा, ताकि पौधरोपण केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे बल्कि उसका वास्तविक लाभ भी सुनिश्चित हो।

50 प्रतिशत होंगे फलदार और चारा प्रजाति के पौधे

प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष लगाए जाने वाले 15.50 लाख पौधों में लगभग 50 प्रतिशत पौधे फलदार एवं चारा प्रजाति के होंगे। साथ ही इन पौधों की अगले पांच वर्षों तक देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों को सौंपी जाएगी।

10 जुलाई तक पूरी करनी होंगी सभी तैयारियां

सभी विभागों को 10 जुलाई तक गड्ढों की खुदाई, जैविक खाद, ट्री-गार्ड और पौधों के परिवहन सहित सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। वन विभाग के मसूरी, कालसी, चकराता और देहरादून प्रभागों के माध्यम से विभिन्न विभागों को पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज कुमार शर्मा, वैभव सिंह, मयंक कुमार, एसडीओ अभिषेक मैठाणी सहित कृषि, उद्यान, उद्योग, शिक्षा, खेल, पेयजल और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

 

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