55 सेकेंड बाद क्यों चुप हो गए कांग्रेस के बड़े नेता? पूरा ‘वंदे मातरम्’ बजने पर गरमाई सियासत

नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान पूरा ‘वंदे मातरम्’ बजाए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो छंदों के बाद भी गीत जारी रहा। इसी दौरान कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के चुप हो जाने और आपस में बातचीत करने के दृश्य सामने आए। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में कांग्रेस के पुराने रुख और मौजूदा घटनाक्रम को लेकर सवाल उठने लगे।

पूरा ‘वंदे मातरम्’ बजने पर क्या हुआ?

कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहले ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती हिस्से का गायन हुआ। इसके बाद गीत आगे भी जारी रहा। कार्यक्रम के वीडियो में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी समेत कुछ नेताओं को कुछ समय बाद गीत के साथ नहीं गाते हुए देखा गया।

इसी दौरान सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत भी हुई। बाद में एक कांग्रेस कार्यकर्ता को बुलाकर कुछ निर्देश दिए गए। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

जयराम रमेश ने असहजता पर क्या कहा?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश से जब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने किसी विवाद से इनकार किया।

उन्होंने कहा कि पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाया गया और इसे रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उनके मुताबिक, मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे और सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी मंगाने की बात कर रही थीं। जयराम रमेश ने इसी को कार्यक्रम के दौरान हुई बातचीत का कारण बताया।

कांग्रेस के पुराने रुख को लेकर क्यों उठे सवाल?

‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस का ऐतिहासिक रुख लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। पार्टी के कार्यक्रमों में मुख्य रूप से इसके शुरुआती दो छंदों को गाया जाता रहा है।

इतिहास के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ के बाद के कुछ छंदों में देवी दुर्गा का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में इसके सभी छंदों को लेकर अलग-अलग समुदायों की धार्मिक संवेदनाओं पर चर्चा हुई थी। बाद में राष्ट्रीय गीत के तौर पर इसके शुरुआती दो छंदों के इस्तेमाल की परंपरा बनी।

यही वजह है कि कांग्रेस मुख्यालय में पूरा गीत बजने के बाद पार्टी के वर्तमान रुख को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

पूरे ‘वंदे मातरम्’ के बजने के दौरान कांग्रेस नेताओं के कथित हावभाव को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा। बीजेपी की ओर से सवाल उठाया गया कि यदि कांग्रेस ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार करती है, तो इसके पूरे संस्करण को लेकर पार्टी की स्थिति क्या है।

कांग्रेस की ओर से हालांकि यह स्पष्ट किया गया कि कार्यक्रम में गीत को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया था।

स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ को मिली प्रमुखता

इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे विशेष महत्व दिया गया। लाल किले के आधिकारिक समारोह में भी इस बार ‘जन गण मन’ से पहले ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया गया।

इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण, उसके ऐतिहासिक संदर्भ और राजनीतिक दलों के रुख को लेकर देशभर में बहस देखने को मिली।

केरल में भी सामने आया अलग रुख

इसी बीच केरल में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर जारी दिशानिर्देश भी चर्चा में रहे। राज्य के स्कूलों को ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाने के निर्देश दिए गए। जारी निर्देशों में ‘वंदे मातरम्’ का विशेष उल्लेख नहीं किया गया था।

केंद्र की ओर से पूरे ‘वंदे मातरम्’ को लेकर दिए गए निर्देशों के बीच यह मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।

कांग्रेस के सामने अब बड़ा सवाल

कांग्रेस मुख्यालय में पूरा ‘वंदे मातरम्’ बजाए जाने के बाद पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल उसके पुराने रुख को लेकर उठ रहा है। एक ओर पार्टी के नेता इसे सामान्य कार्यक्रम बताते हुए किसी विवाद से इनकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम के वीडियो को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

फिलहाल कांग्रेस की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि पूरा ‘वंदे मातरम्’ बजाए जाने में कोई आपत्ति नहीं थी और इसे रोकने की कोशिश नहीं की गई।

 

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