Advertisement

दिव्यांगों के IAS-PCS सपने को लगे पंख, देहरादून में 19 लाख का हाईटेक कोचिंग सेंटर

उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों के अभ्यर्थी भी ऑनलाइन कक्षाओं से कर सकेंगे तैयारी, जल्द शुरू होगी बैंकिंग और SSC परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग

देहरादून। उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों में रहने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सिविल सेवा में जाने का सपना अब आसान बनाने की दिशा में पहल की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अनुरूप देहरादून में दिव्यांग अभ्यर्थियों को आईएएस और पीसीएस परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग दी जा रही है। आधुनिक तकनीक से लैस इस व्यवस्था के माध्यम से गढ़वाल और कुमाऊं के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी भी घर बैठे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। खास बात यह है कि कोचिंग केंद्र में जल्द ही बैंकिंग और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू की जाएगी।

19 लाख रुपये की लागत से तैयार हुआ हाईटेक कोचिंग सेंटर

समाज कल्याण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के संयुक्त प्रयासों से संचालित इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। इसके तहत प्रत्येक जिले से चयनित दिव्यांग अभ्यर्थियों को कोचिंग की सुविधा दी जा रही है।

देहरादून के राजपुर रोड स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान में स्थापित इस केंद्र को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। जिला प्रशासन देहरादून और समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत 19 लाख रुपये की लागत से हाईटेक साउंडप्रूफ कोचिंग रूम तैयार कराया है।

केंद्र में 75 इंच की टीवी स्क्रीन, वीडियो मिक्सर, कॉर्डलेस माइक्रोफोन, तीन कंप्यूटर कंसोल, थिएटर लाइट और हाईटेक कैमरों सहित आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इनकी मदद से कक्षाओं का डिजिटल माध्यम से संचालन किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले अभ्यर्थियों तक भी शिक्षण सामग्री और मार्गदर्शन पहुंच सके।

ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़ रहे गढ़वाल-कुमाऊं के विद्यार्थी

इस कोचिंग व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बार-बार देहरादून आने की जरूरत नहीं है। प्रतिदिन शाम चार से सात बजे तक ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। गूगल मीट और साइन लैंग्वेज जैसी सुविधाओं के जरिए विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कोचिंग में सामान्य अध्ययन (जीएस), सीसैट, तार्किक क्षमता, गणित और अन्य संबंधित विषयों की तैयारी कराई जा रही है। विषय विशेषज्ञ विद्यार्थियों की अवधारणाओं को स्पष्ट करने और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयार करने पर ध्यान दे रहे हैं।

IAS-PCS के बाद बैंकिंग और SSC की भी मिलेगी कोचिंग

समाज कल्याण विभाग के सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग की व्यवस्था शुरू की गई है। इसका उद्देश्य उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल केंद्र में आईएएस और पीसीएस परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। विद्यार्थियों के लिए रोजगार और करियर के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से जल्द ही बैंकिंग और एसएससी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग भी शुरू की जाएगी।

दिव्यांग अभ्यर्थियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

देहरादून जिले से चयनित अभ्यर्थी मोहन दास के अनुसार, इस पहल से दिव्यांग विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को एक मंच पर जोड़ना इस व्यवस्था की अहम विशेषता है।

यह पहल उन अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें आर्थिक संसाधनों की कमी, भौगोलिक दूरी या अन्य कठिनाइयों के कारण बड़े शहरों में जाकर कोचिंग लेना मुश्किल होता है।

समान अवसरों से मजबूत होगा आत्मविश्वास

दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई निःशुल्क कोचिंग व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना भी है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ शिक्षकों के मार्गदर्शन और ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले अभ्यर्थियों तक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि प्रतिभा किसी शारीरिक अक्षमता या भौगोलिक दूरी की मोहताज नहीं होती। उचित संसाधन, मार्गदर्शन और समान अवसर मिलने पर दिव्यांग विद्यार्थी भी सिविल सेवा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!