Advertisement

डीएवी में सर्दियों से पहले समर वैकेशन! दाखिले के बाद फिर 8 दिन की छुट्टी, पढ़ाई पर संकट

दाखिला प्रक्रिया पूरी होते ही फिर लगा छुट्टियों का ब्रेक, पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका; छुट्टियों के नियमों पर शिक्षकों ने उठाए सवाल

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज में इस बार सर्दियों की दस्तक से पहले ही गर्मियों की छुट्टियां चर्चा का विषय बन गई हैं। कॉलेज प्रबंधन ने गर्मियों की शेष छुट्टियों को दशहरे के अवकाश के साथ समायोजित करते हुए कॉलेज को करीब आठ दिन के लिए बंद रखने का निर्णय लिया है। इससे नए सत्र में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों और नियमित कक्षाओं की तैयारी कर रहे शिक्षकों के बीच पढ़ाई के प्रभावित होने को लेकर चिंता बढ़ गई है।

दरअसल, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों को सालाना 40 दिन का ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता है। इस बार कई अशासकीय कॉलेजों ने दाखिला प्रक्रिया समय पर शुरू करने के उद्देश्य से निर्धारित अवकाश से पहले ही कक्षाएं और कॉलेज संबंधी गतिविधियां शुरू कर दी थीं। डीएवी पीजी कॉलेज ने भी गर्मियों की छुट्टियों में कटौती कर पहले कॉलेज खोलने का फैसला लिया था, ताकि प्रवेश प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सके।

दाखिले के बाद शुरू हुईं कक्षाएं, फिर छुट्टियों का ऐलान

कॉलेज में 15 अक्टूबर तक दाखिला प्रक्रिया चलने के बाद नियमित पढ़ाई शुरू हुई थी। इसी बीच प्रबंधन ने ग्रीष्मकालीन अवकाश के बचे हुए दिनों में से चार दिन दशहरे के आसपास समायोजित कर दिए। नवमी और दशमी की छुट्टियों को मिलाकर कॉलेज में लगातार करीब आठ दिन का अवकाश हो गया है।

ऐसे समय में छुट्टियों का ऐलान हुआ है, जब नए सत्र के विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं के जरिए पढ़ाई की गति पकड़नी थी। अब लंबे अंतराल के कारण पाठ्यक्रम पूरा करने और निर्धारित समय पर शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

प्राचार्य बोले- नियमों के तहत लिया गया फैसला

डीएवी पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. कौशल कुमार के मुताबिक, विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेजों को 40 दिन का ग्रीष्मकालीन अवकाश दिया जाता है। कॉलेज ने इस बार जल्द खोलने के लिए केवल 28 दिन का अवकाश लिया था। शेष 12 दिनों में से चार दिन दशहरे के अवसर पर समायोजित किए गए हैं।

प्राचार्य का कहना है कि छुट्टियों का समायोजन निर्धारित नियमों के तहत किया गया है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

छुट्टियों की व्यवस्था पर शिक्षकों ने उठाए सवाल

कॉलेज के कुछ शिक्षकों का कहना है कि गर्मियों की छुट्टियों के दौरान कॉलेज जल्दी खोलने का उद्देश्य दाखिला प्रक्रिया और अन्य जरूरी काम समय पर पूरा करना था। उस दौरान नियमित कक्षाएं नहीं चल रही थीं, लेकिन अब दाखिले पूरे होने के बाद विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरू हुई है। ऐसे में दोबारा लंबा अवकाश मिलने से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

शिक्षकों के मुताबिक, दशहरे के बाद दीपावली पर भी छुट्टियां होने की संभावना है। इसके बाद सेमेस्टर परीक्षाओं का कार्यक्रम सामने आएगा। ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए सीमित समय मिल सकता है और पाठ्यक्रम पूरा करने का दबाव बढ़ सकता है।

सरकारी और अशासकीय कॉलेजों में छुट्टियों के नियमों पर बहस

इस मामले ने राज्य के सरकारी और अशासकीय कॉलेजों में अवकाश व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। शिक्षकों का सवाल है कि जब सभी कॉलेज विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं, तो छुट्टियों के निर्धारण और उनके समायोजन की व्यवस्था में अंतर क्यों दिखाई देता है।

फिलहाल कॉलेज प्रबंधन ने अपने फैसले को नियमानुसार बताया है, जबकि शिक्षकों की चिंता नियमित पढ़ाई और सेमेस्टर परीक्षाओं की तैयारी को लेकर बनी हुई है। अब देखना होगा कि छुट्टियों के बाद कक्षाओं का संचालन किस तरह होता है और विद्यार्थियों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्था की जाती है या नहीं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!