Advertisement

निगम कर्मियों की बल्ले-बल्ले! बोनस देने का फैसला अब निगम खुद लेंगे

Uttarakhand Bonus News 2026: सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में कार्यरत पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए तदर्थ बोनस मिल सकेगा। सचिव विनय शंकर पांडेय ने सभी प्रशासनिक विभागों को जारी किए निर्देश।

देहरादून। उत्तराखंड में सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने इन संस्थानों के पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए तदर्थ बोनस देने का रास्ता साफ कर दिया है। अब संबंधित सार्वजनिक उपक्रम और निगम अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन कर कर्मचारियों को बोनस देने के संबंध में स्वयं निर्णय ले सकेंगे। इसके लिए वित्त विभाग से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

इस संबंध में औद्योगिक विकास अनुभाग-2 के सचिव विनय शंकर पांडेय ने 5 नवंबर को सभी संबंधित प्रशासनिक विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था वित्त विभाग की ओर से 2 नवंबर को जारी शासनादेश के क्रम में की गई है।

सार्वजनिक उपक्रमों को अपने स्तर पर निर्णय लेने की छूट

वित्त विभाग के शासनादेश के तहत राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों के पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए उत्पादकता असंबद्ध बोनस यानी तदर्थ बोनस देने की स्वीकृति दी गई है।

इसी क्रम में सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को भी यह अधिकार दिया गया है कि जिन सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में बोनस की देयता बनती है और जो संस्थान अपने संसाधनों से इसका वित्तीय भार उठाने में सक्षम हैं, वे निर्धारित शर्तों के तहत कर्मचारियों को बोनस देने का निर्णय स्वयं ले सकते हैं।

अधिकतम 7 हजार रुपये तक बोनस की गणना

शासनादेश के अनुसार समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के साथ समूह ‘ख’ के अराजपत्रित कर्मचारी भी तदर्थ बोनस के पात्र होंगे। इसके लिए अधिकतम 4800 रुपये ग्रेड वेतन यानी पुनरीक्षित वेतनमान में लेवल-8 तक की सीमा निर्धारित की गई है।

ऐसे कर्मचारी, जो किसी उत्पादकता आधारित बोनस योजना के अंतर्गत नहीं आते हैं, इस लाभ के पात्र होंगे। केंद्र सरकार के आदेश के अनुरूप अधिकतम 30 दिन की परिलब्धियों के आधार पर 7,000 रुपये की गणना सीमा तय की गई है। हालांकि, वास्तविक भुगतान कर्मचारी की पात्रता और निर्धारित गणना के आधार पर किया जाएगा।

छह महीने की सेवा पूरी करना जरूरी

बोनस का लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जो 31 मार्च 2026 को सेवा में कार्यरत थे और जिन्होंने इस तारीख तक कम से कम छह महीने की निरंतर एवं संतोषजनक सेवा पूरी की हो। एक वर्ष से कम लेकिन छह महीने या उससे अधिक सेवा करने वाले कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि के अनुपात में बोनस दिया जाएगा।

कैजुअल और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी प्रावधान किया गया है। छह कार्यदिवस वाले कार्यालयों में पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन और पांच कार्यदिवस वाले कार्यालयों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 206 दिन काम करने वाले कर्मचारी निर्धारित शर्तों के अधीन बोनस के पात्र होंगे। इनके लिए अधिकतम 1200 रुपये की मासिक परिलब्धि के आधार पर 30 दिनों का तदर्थ बोनस 1184 रुपये निर्धारित किया गया है।

विभागीय कार्रवाई वाले कर्मचारियों पर लागू होंगी शर्तें

शासनादेश में बोनस भुगतान को लेकर कुछ प्रतिबंध भी निर्धारित किए गए हैं। जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमा लंबित है, उनका बोनस भुगतान मामले का परिणाम आने तक स्थगित रहेगा। दोषमुक्त होने पर नियमानुसार बोनस का लाभ दिया जा सकेगा।

वहीं, वर्ष 2025-26 के दौरान विभागीय कार्रवाई या आपराधिक मुकदमे में दंडित कर्मचारियों को तदर्थ बोनस देय नहीं होगा। अवैतनिक अवकाश को छोड़कर अन्य अवकाश की अवधि को पात्रता की गणना में शामिल किया जाएगा। निलंबित कर्मचारियों पर भी शासनादेश में निर्धारित शर्तें लागू होंगी।

स्थानीय निकाय और विकास प्राधिकरण भी लाभ की स्थिति में अपने कर्मचारियों को बोनस दे सकेंगे, लेकिन इसके लिए आवश्यक धनराशि संबंधित संस्थान को अपने संसाधनों से ही वहन करनी होगी। सरकार की ओर से इसके लिए कोई अतिरिक्त अनुदान नहीं दिया जाएगा।

नकद मिलेगा बोनस, वेतन मद में होगा लेखांकन

वित्त विभाग के निर्देशों के अनुसार अनुमन्य तदर्थ बोनस का भुगतान कर्मचारियों को नकद धनराशि के रूप में किया जाएगा। इसकी प्रविष्टि संबंधित कर्मचारियों के वेतन व्यय वाले लेखाशीर्षक में की जाएगी और मानक मद ‘वेतन’ के अंतर्गत इसका लेखांकन होगा।

सूर्य प्रकाश रणाकोटी ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रकाश रणाकोटी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार का आभार जताते हुए कहा कि निगम कर्मचारियों के हित में यह महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से बोनस मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे। सरकार ने निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों को अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर बोनस देने का निर्णय लेने का अधिकार देकर सकारात्मक पहल की है। रणाकोटी ने सचिव विनय शंकर पांडेय का भी आभार जताया।

उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी निगम और सार्वजनिक उपक्रम अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन कर पात्र कर्मचारियों को जल्द बोनस का लाभ देंगे। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!